Monday, October 18, 2021

 

 

 

भाजपा राम मंदिर निर्माण में रोड़ा, हनुमान को दलित कहना अपमानजनक: शंकराचार्य स्वरूपानंद

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जबलपुरः ज्योतिषाचार्य एवं द्वारका शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि अयोद्धा में राम मंदिर के निर्माण में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रोड़ पैदा कर रही है। उन्होने कहा, वह तो सिर्फ 2019 के आगामी लोकसभा चुनाव में लाभ हासिल करने के लिए एक हथकंडे के रूप में इस मुद्दे को उछाल रही है।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि कायदे से राममंदिर को लेकर संसद को एक प्रस्ताव बनाकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। जिसके आधार पर राममंदिर निर्माण के रास्ते की बाधा को समाप्त किया जाए। लेकिन भाजपा ऐसा न करके राममंदिर की बात कहकर जनता को सिवाय भ्रमित करने के और कुछ नहीं कर रही है। यहां तक कि अध्यादेश लाए जाने की बेतुकी बात भी समय-समय पर सामने आती रहती है। जबकि राममंदिर के मुद्दे पर अध्यादेश किसी भी दृष्टि से प्रासंगिक नहीं होगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि रामलला के लिए 67 एकड़ भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है।

उन्होंने मौजूदा भाजपा सरकार की नीयत पर सवाल उठाया और कहा कि राम मंदिर का भव्य निर्माण चारों शंकराचार्यो, रामानंदाचार्यो, रामानुजाचार्यो, मध्वाचार्यो, निम्बर्काचार्यो, तेहर अखाड़ों के प्रमुखों आदि पर्यवेक्षण में ही कराया जाना चाहिए, न कि किसी समाजिक, या सांस्कृतिक अथवा राजनीतिक संस्था से संबंधित व्यक्तियों की इकाईयों द्वारा। उन्होंने कहा कि भगवान के मंदिर बनते है और आदमी की मूर्तियां खुले में लगाई जाती है। गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 188 फुट विशाल मूर्ति बनाई गई है। भगवान राम की विशालकाय मूर्ति खुले में स्थापित हुई तो पक्षी गंदगी करेंगे जो धर्म विरोधी है। भगवान राम की मूर्ति के निर्माण में भी तीन हजार करोड़ रूपए से अधिक खर्च होगा।

rame statue 759

स्वामी स्वारूपानंद ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सरयू नदी के किनारे भगवान राम की विशालकाय मूर्ति बनाने संबंधी प्रस्ताव को धर्म विरोधी करार दिया है। भगवान राम की विशालकाय मूर्ति और हनुमान जी को दलित बताकर भाजपा उन्हें मानव की श्रेणी में लाना चाहती है। उन्होने कहा, हनुमानजी के बारे में रामचरित मानस में आया है कि कांधे मूज जनेऊ साजे, इसका सीधा सा अर्थ है कि वे ब्राह्मण थे न कि दलित।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमान को दलित संबोधित किए जाने पर कहा,  त्रेतायुग में दलित शब्द था ही नहीं। सबसे पहले गांधी ने वंचित वर्ग को हरिजन कहकर पुकारा और बाद में मायावती ने दलित शब्द इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

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