मुंबई | उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान किसानो के ऋण माफ़ करने की घोषणा करने वाली बीजेपी अब बाकी राज्यों में सवालो के घेरे में आ गया है. बीजेपी शासित राज्यों में विपक्ष , सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की योजना बना रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष ने इस मुद्दे को जमकर उठाया और सरकार से पुछा की अगर उत्तर प्रदेश में किसानो का कर्ज माफ़ हो सकता है तो यहाँ क्यों नही?

दरअसल बीजेपी ने उत्तर प्रदेश चुनावो में किसानो से वादा किया है की वो सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में सभी किसानो का सभी प्रकार का कर्ज माफ़ करने का आदेश जारी कर देंगे. अब यही घोषणा बीजेपी शासित राज्यों में उनके गले की हड्डी बनने जा रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष कई दिन इसी मुद्दे को लेकर हंगामा कर रहा है. चौकाने वाली बात यह है की सरकार की सहयोगी शिवसेना भी इस मामले में विपक्ष के साथ खड़ी नजर आ रही है.

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा की सूबे में बीजेपी-शिवसेना सरकार बनने के बाद करीब साढ़े आठ हजार किसानो ने आत्महत्या की है. अकेले 3052 किसानो ने पिछले साल आत्महत्या की है. पुरे देश में महाराष्ट्र के अन्दर किसान सबसे ज्यादा खुदखुशी कर रहे है. लेकिन बीजेपी उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के बाद किसानो के ऋण माफ़ी का वादा कर रही है जबकि महाराष्ट्र में सरकार होते हुए भी किसानो का कर्ज माफ़ नही कर रही है.

उधर महाराष्ट्र सरकार की और से वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने सफाई देते हुए कहा की हमने किसानो के लिए कई नई योजनाये चलाई है. हमारी सरकार का मकसद किसानो के लिए आधारभूत सुविधाए जुटाने की और है. इसलिए हमने सिंचाई और अन्य सुविधाओ के लिए कांग्रेस सरकार से ज्यादा पैसो का आवंटन किया है. हमारे लिए अगर एक भी किसान आत्महत्या करता है तो यह काफी दुखद है. रही बात कांग्रेस की मांग तो ये लोग किसानो का नही बल्कि बैंकों का कर्ज माफ़ करवाना चाहते है. 2009 में भी ऐसा ही किया गया था.

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