रायपुर | एक तरह बिहार है जहाँ की नितीश सरकार ने पुरे प्रदेश में शराब बंदी कर दी है और दूसरी तरह छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार है जिसने जनहित में खुद ही शराब बेचने का फैसला किया है. हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने भी शराब पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईवे पर 500 मीटर के दायरे में शराब बेचने पर रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ज्यादातर राज्य सरकार इसका तोड़ निकालने में जुट गई है.

दरअसल पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो रहे है. लोग सरकार से अपने फैसला वापिस लेने की मांग कर रहे है. बताते चले की राज्य सरकार ने इस वित्त वर्ष से शराब बेचने की ठेकेदारी प्रथा को बंद कर दिया है. मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने फैसला किया है की राज्य में शराब ठेकेदार नही बल्कि सरकार खुक बेचेगी. इसके लिए कार्ययोजना भी तैयार कर ली गयी है.

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सरकार सभी गाँव और शहर में दूकान खोलकर शराब की बिक्री करेगी. इसके लिए ग्राम पंचायतो और नगर पालिकाओ को निर्देश जारी कर दिए गए है. काफी जगहों पर दुकानों का निर्माण भी शुरू हो चूका है. लेकिन स्थानियों लोगो ने इन दुकानों का विरोध करना शुरू कर दिया है. खासकर महिलाये सरकार के फैसले के खिलाफ काफी मुखर दिख रही है. पुरे प्रदेश से खबरे आ रही है की निर्माणाधीन दुकानों में तोड़फोड़ की जा रही है.

राजधानी रायपुर के महात्मा गांधी नगर और डूमरतराई में स्थानियों लोगो ने निर्माणाधीन दुकानों को गिराकर उस स्थान को मिटटी से पाट दिया. यहाँ की पार्षद श्रद्धा मिश्रा ने कहा की सरकार , जनता की भावनाओं और कानून को ताक पर रखकर इन दुकानों का निर्माण करा रही है. जो सरासर गलत है. उधर विपक्षी दल कांग्रेस ने रमन सरकार को विधानसभा में घेरने की कोशिश की. इसके अलावा युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओ ने बुधवार को कई जगह पर अपनी गिरफ्तारिया दी.

दरअसल सरकार शराब से होने वाले राजस्व का मोह नही छोड़ पा रही है. एक आंकड़े के मुताबित सरकार को शराब से हर साल 3347 करोड़ रूपए का राजस्व प्राप्त होता है. हालाँकि खूब बीजेपी के अन्दर सरकार के इस फैसले के खिलाफ आवाजे उठने लगी है. बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय ने कहा की वो प्रदेश में पूर्णतयः शराब बंदी के पक्ष में है. उम्मीद है जल्द ही सरकार इस पर निर्णय लेगी.

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