मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा बुधवार को राज्य में हुई पाकिस्तानी जासूसों गिरफ्तारी के बाद एक बड़ा खुलासा हुआ हैं. माना जा रहा है कि पिछले साल पठानकोट और उरी में हुए आतंकी हमले को कराने में ही इन्ही जासूसों ने मदद की थी. पकड़े गए आईएसआई नेटवर्क के जरिए एटीएस इन दोनों जगह सैन्य ठिकानों पर हुए आतंकी हमले के बारे में पता लगा रही है. इस मामले में एटीएस ने अपनी जांच शुरु कर दी.

एटीएस को पठानकोट और उरी में हुए हमलों से जुड़ी जानकारी इन जासूसों के पास से भी मिली हैं. ये जानकारी वैसी ही हैं जो आतंकियों के पास थी. ये जानकारी पाकिस्तान में मध्य प्रदेश के नेटवर्क का इस्तेमाल कर भेजी जा रही थी. एटीएस का कहना हैं कि आईएसआई ने अपना नेटवर्क जिस तेजी से बढ़ाया है वहां पर जरुर कोई घटना घट सकती है.

याद रहें कि मध्य प्रदेश एटीएस ने जिन आईएसआई के 11 एजेंटों को गिरफ्तार किया था वे सभी कॉल सेंटर की आड़ में सेना की सीक्रेट इन्फॉर्मेशन पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को भेजते थे. इनकी गिरफ्तारी प्रदेश के अलग-अलग शहरों भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और सतना से की गई.

इन 11 एजेंटों में से एक आरोपी बजरंग दल का कार्यकर्ता हैं. बजरंग दल के कार्यकर्त्ता बलराम के साथ करीब 46 लोग जुड़े हुए हैं. जो इसी पुरे नेटवर्क में शामिल थे.बलराम ने इसी मामले में सतना के दो डॉक्टरों के शामिल होने की बात कबूली हैं. इनके बैंक खातों में आईएसआई की और से विदेशों से पैसा जमा हुआ हैं. इस मामले में बलराम के भाई विक्रम को भी हिरासत में लिया गया है.

भारतीय जनता युवा मौर्चा की आईटी सेल का संयोजक ध्रुव बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ

वहीँ दो आरोपी बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. भोपाल का रहने वाला ध्रुव सक्सेना भारतीय जनता युवा मौर्चा की आईटी सेल का संयोजक है. जो बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का सबसे करीबी सहयोगी बताया जा रहा हैं. इसके अलावा उसके राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भोपाल महापौर आलोक शर्मा, भोपाल सांसद आलोक संजर के साथ भी करीबी रिश्तें हैं.  वह कई बार इनके साथ मंच साझा कर चुका है. वहीँ दूसरा आरोपी जीतेन्द्र जो ग्वालियर के रहने वाला हैं. जितेन्द्र के भाई की पत्नी ग्वालियर में पार्षद है.

गुरुवार को प्रेस कांन्फ्रेंस में एटीएस चीफ संजीव शमी ने कहा कि ये लोग इंटरनेट कॉल को सेल्युलर कॉल में ट्रांसफर कर देते थे. इससे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की आइडेंटिफिकेशन नहीं हो सकती थी. आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए टेलीफोन एक्सचेंज ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर में मिले हैं. ये लोग पैरेलल टेलीफोन एक्सचेंज चलाते थे. सभी पर देशद्रोह और इंडियन टेलीग्राफ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

शमी के अनुसार, नवंबर 2016 में जम्मू से सतविंदर और दादू को गिरफ्तार किया गया था. सतविंदर पाक हैंडलर्स के कहने पर मिलिट्री इन्फॉर्मेशन इकट्ठा कर पाक हैंडलर्स को दे रहा था. सतविंदर के अकाउंट में पैसे सतना का बलराम डिपॉजिट करता था.

इन एजेंटों को पकड़ने में केंद्रीय टेलिकॉम मंत्रालय की टीईआरएम (टेलिकॉम एनफोर्समेंट रिसोर्स एंड मॉनिटरिगं) सेल ने एटीएस की मदद की है. जनवरी में यूपी एटीएस ने 11 लोगों को इसी तरह का अवैध टेलिकॉम एक्सचेंज चलाने के मामले में गिरफ्तार किया था.


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