मार्च 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े बिलकिस बानो दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात सरकार से मुआवज़े की रक़म को बढ़ाने वाली याचिका पर 6 हफ्ते में जवाब मांगा है.

दरअसल, बिलकिस बानो की और से याचिका दायर कर मुआवजा बढ़ाने की मांग की गई, साथ ही तीन दोषियों को मौत की सजा दिए जाने का आग्रह किया गया. कोर्ट ने गुजरात सरकार से सवाल किया कि दोषी पुलिसवालों व डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है?

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सवाल उठाया था कि केस में सजायाफ्ता पुलिसवाले व डॉक्टर काम कैसे कर सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से इस संबंध में पूछा था कि दोषी पुलिसवालों व डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है, ये बताएं.

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अभियोजन पक्ष के अनुसार तीन मार्च, 2002 को अहमदाबाद के निकट रंधिकपुर गांव में बिलकिस बानो के परिवार पर दक्षिणपंथियों ने हमला किया था और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी. अहमदाबाद में मामले की सुनवाई शुरू हुई थी.

हालांकि बिलकिस बानो के गवाहों को नुकसान पहुंचाए जाने और सबूतों से छेड़छाड़ किए जाने की आशंकाएं जताए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगस्त 2004 में मुम्बई स्थानांतरित कर दिया था.

एक विशेष अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया था और आजीवन कारावास की सजा दी.

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