भोपाल | त्यौहार के मौके पर जेल में बंद कैदियों से मिलने उनके काफी करीबी आते है. ऐसे में जेल प्रशासन को भी काफी चौकस रहना पड़ता है. हालाँकि जेल नियमो के मुताबिक कैदियों से मिलने आये सभी मुलाकातियो की पहचान के लिए उनके हाथो की कलाई पर जेल की मोहर लगाई जाती है. यह मसक्कत करने का मकसद यह है की कही मुलाकातियो के साथ साथ कैदी भी जेल से बाहर न निकल जाए.

लेकिन भोपाल की केन्द्रीय जेल का रिवाज कुछ और है. यहाँ मुलाकातियो की कलाई पर नही बल्कि उनके चेहरे पर जेल की मोहर लगाई जाती है. रक्षा बंधन के दिन, दो बच्चो की एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई जिसमे बच्चो की कलाई की बजाय उनके चेहरे पर जेल प्रशासन की मोहर लगी हुई थी. यह तस्वीर मीडिया में आते ही राज्य मावाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लिया और जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर दिया.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

हालाँकि अपनी सफाई में जेल प्रशासन का कहना है की यह जानबूझकर नही किया गया बल्कि गलती से मोहर बच्चो के चेहरे पर लग गयी. जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे का कहना है की यह सब जानबूझकर नहीं किया गया, उस दिन जेल में करीब साढ़े आठ हजार लोग कैदियों से मिलने आये हुए थे. इनमे से काफी महिलाए और लडकिया बुर्का पहन कर आई थी. इसलिए गलती से मोहर उनके हाथ की बजाय गाल पर लग गयी. सिर्फ गलती से लगी मोहर के लिए हम कार्यवाही नही कर सकते. हाँ अगर यह पता चले की जानबूझकर ऐसा किया गया है तो आरोपी के खिलाफ जरुर कार्यवाही की जाएगी.

मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के जनसपर्क अधिकारी एल आर सिसोदिया का कहना है की आयोग ने मीडिया में एक किशोरी और दो बच्चो की चेहरे पर मोहर लगी तस्वीर सामने आने के बाद जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर 7 दिन के अन्दर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. यह बाल अधिकारों एवं मानवधिकारो का उलंघन है.

Loading...