गाजियाबाद जिले के मोदीनगर में हुए भोजपुर एनकाउंटर मामले में बीस साल बाद सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुना दिया. सोमवार को विशेष सीबीआई न्यायाधीश राजेश चौधरी की कोर्ट ने मामले में चार पुलिसकर्मियों को हत्या और फर्जी सुबूत पेश करने के आरोप में दोषी करार दिया.

इस मामले में कोर्ट ने 20 साल 3 महीने बाद फैसला सुनाया. दोषियों में एक पूर्व डिप्टी एसपी व एक पूर्व सब इंस्पेक्टर और दो सिपाही शामिल हैं. न्यायालय 22 फरवरी को दोषियों को सजा सुनाएगा. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा, पुलिस ने वाहवाही लूटने के लिए चार निहत्थे युवकों पर गोलियां बरसाकर मुठभेड़ में मार गिराया.

8 नवंबर 1996 को भोजपुर पुलिस ने चार युवकों को एनकाउंटर में मार गिराने का दावा किया था. मारे गए युवक मोदीनगर की विजयनगर कालोनी के जलालुद्दीन, प्रवेश, जसवीर और अशोक थे, जो फैक्ट्री में नौकरी और मजदूरी करते थे.

इसके बाद मारे गए युवकों के परिजनों ने इसे फर्जी बताया था. इसके बाद 20 साल से कोर्ट में यह मामला चल रहा है. सीबीआई कोर्ट ने भोजपुर थाना के तत्कालीन एसओ लाल सिंह, सब इंस्पेक्टर जोगिंदर सिंह, सिपाही सूर्यभान व सुभाष चंद को दोषी बताया. इस मामले के पांचवें आरोपी सिपाही रणवीर की ट्रॉयल के दौरान 2004 में मौत हो चुकी है.

कोर्ट का कहना है कि पुलिस ने निहत्थे युवकों पर फायरिंग की. इस मामले में तत्कालीन क्षेत्राधिकारी व आईपीएस अधिकारी ज्योति बैलूर भी आरोपी हैं. अभी ज्योति को दोषी नहीं बताया गया है. ज्योति बैलूर भारतीय पुलिस सेवा से इस्तीफा दे चुकी हैं और यूरोप में बस गई हैं.


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