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गोरखपुर और फूलपुर की हाई प्रोफाइल सीटों पर हर झेल चुकी बीजेपी के लिए कैराना उपचुनाव बहुत अहमियत वाला था. लेकिन दुर्भाग्य से बीजेपी को यहाँ भी हार का चेहरा देखना नसीब हुआ है. ऐसे में पार्टी के भीतर मंथन का दौर जारी है.

इसी बीच बीजेपी और आरएएस के नेताओं ने इस हार के लिए भीम आर्मी को जिम्मेदार माना है. नेताओं का मानना है कि भीम आर्मी की वजह से दलित और मुस्लिम वोट एकजुट हुआ और बीजेपी के विरोध में गया.

बीजेपी के एक नेता ने कहा, ‘पिछले साल जातीय हिंसा के बाद भीम आर्मी लोगों की नजर में आई. जातीय हिंसा के खिलाफ भीम आर्मी का प्रभाव है. कैराना उपचुनाव में भीम आर्मी ने खास तौर पर दो क्षेत्रों नकुर और गंगोह में प्रभाव डाला क्योंकि इन दोनों ही जगहों पर 2 लाख से अधिक वोट हैं. दलितों और मुस्लिमों को एकजुट कर बीजेपी के खिलाफ खड़ा करने में भीम आर्मी सफल हो रही है.’

बीजेपी नेता ने कहा, ‘भीम आर्मी ने रात में भी कैंप लगाकर लोगों को मतदान के लिए उत्साहित किया। चुनाव वाले दिन भी भीम आर्मी के सदस्य दलित और मुस्लिम वोटरों को मतदान के लिए बूथ तक ले जाने में सफल रहे. नकुर और गंगोह 2 ऐसे क्षेत्र हैं जहां बीजेपी के डेप्युटी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने युद्ध स्तर पर चुनाव प्रचार किया था. इस क्षेत्र से ही आरएलडी उम्मीदवार को 28 हजार से अधिक की लीड मिल गई.’

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा, ‘कैराना उपचुनाव में 5 क्षेत्रों में हमारा फोकस थाना भवन और कैराना पर मुख्य रूप से था. भीम आर्मी एक स्थानीय मुद्दा है और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में हम इसका खास तौर पर ख्याल रखेंगे.

बता दें कि वकील चंद्रशेखर आजाद ने भीम आर्मी की स्थापना की थी. उन्हें 2017 में नैशनल सिक्यॉरिटी ऐक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया. वे फ़िलहाल जेल में है.

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