प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते दिनों पकोड़े बेचे जाने को रोजगार बताए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद थमा नहीं था कि अब आरएसएस की और से भीख मांगने को रोजगार बताकर नया विवाद पैदा किया गया है. आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि भीख मांगना भी एक तरह का रोजगार है.

उन्होंने कहा कि ‘भीख मांगना भी देश के 20 करोड़ लोगों का रोजगार है, जिन्हें किसी ने रोजगार नहीं दिया उन लोगों को धर्म में रोजगार मिलता है, जिस परिवार में पांच पैसे की कमाई भी न हो उस परिवार का दिव्यांग और दूसरे सदस्य धार्मिक स्थलों में भीख मांगकर परिवार का गुजारा करता है, ये छोटा काम नहीं है.”

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साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पकोड़े के संदर्भ में दिये गए बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि पकौड़े तलना देश के 15 करोड़ से ज्यादा लोगों का व्यवसाय है, और इसे हीन काम नहीं समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर पकौड़े बेचने को भी लोग हीन काम समझते हैं तो ये बेहद दुखद है.

इस मामले में अब कांग्रेस ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी की सरकार रोजगार के मामले में घिरने लगी तो मोदी ने कहा युवा पकोड़े बेचें. अब भीख मांगने को रोजगार बताकर इंद्रेश कुमार ने नौजवानो के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है. मोदी की चाटुकारिता और सत्ता के घमंड में भाजपा और आरएसएस के नेता युवाओं का लगातार अपमान कर रहे हैं.

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा, 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले मोदी सरकार ने दो करोड़ रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन आज 4 साल पूरे होने को हैं, 2 करोड़ रोजगार तो दूर की बात है। ये 25 लाख युवाओं को भी रोजगार नहीं दे पाए.

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