Monday, October 18, 2021

 

 

 

500 रूपए में बेची जा रही भारतीयों की बैंक डिटेल , पाकिस्तान से जुड़े है मामले के तार

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credit card details

मुंबई | दुनिया में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बाद डिजिटल लेनदेन भी काफी बढ़ गया है. अब लोग कैश के जरिये नही बल्कि कार्ड के जरिये शौपिंग करना ज्यादा पसंद करते है. खासकर ऑनलाइन शौपिंग के बढ़ते ट्रेंड के बाद कार्ड से पेमेंट करने में भी तेजी देखी गयी है. लेकिन तकनीक के बढ़ते प्रभाव के जितने फायदे है उतने नुक्सान भी है. जैसे अगर आपके कार्ड की जानकारी अगर किसी गलत हाथो में चली जाए तो आपकी मेहनत की जमा पूंजी हवा भी हो सकती है.

हालाँकि यह जितना सुनने में आसान लगता है उतना है भी नही. लेकिन डिजिटल वर्ल्ड में कुछ भी नामुमकिन भी नही. इसकी एक बानगी भारत में ही देखने को मिली है. मध्य प्रदेश के सायबर सेल ने दो ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो केवल 500 रूपए में खाताधारको की बैंक डिटेल ऑनलाइन बेच रहे थे. चौकाने वाली बात यह है की इस मामले के तार पाकिस्तान के एक गैंग से जुड़े हुए मिले है.

मिली जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश पुलिस में एक बैंक अधिकारी जयकिशन गुप्ता ने डिजिटल फोर्जरी की शिकायत दर्ज कराई थी. अपनी शिकायत में उन्होंने बताया था की 28 अगस्त को अचानक से उनके क्रेडिट कार्ड से 72,401 रूपए डेबिट कर लिए गए. पुलिस ने इसे सायबर क्राइम का केस मानते हुए इसे मध्य प्रदेश के सायबर सेल को हस्तांतरित कर दिया. जब मामले की जाँच की गयी तो पता चला की मुंबई के रहने वाले रामकुमार पिल्लई ने उनके कार्ड से एक एयर टिकेट खरीदा है.

बाद में फर्जी ग्राहक बनकर पुलिस ने पिल्लई से सम्पर्क साधा. पुलिस ने बीट कॉइन के जरिये इंदौर की रहने वाली एक महिला की डेबिट कार्ड की डिटेल पिल्लई से खरीदी. पिल्लई ने केवल 500 रूपए में यह डिटेल पुलिस को मुहैया करा दी. बाद में पुलिस ने पिल्लई और उसके अन्य साथी रामप्रसाद नाडर को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में पता चला की इस मामले के तार पाकिस्तान के गैंग से जुड़े हुए है जिसको शैख़ अफजल संचालित करता है.

मामले की जांच कर रहे साइबर सेल के सुप्रींटेंडेंट ऑफ पुलिस जीतेंद्र सिंह ने बताया की हमने मामले में दो गुर्गो को गिरफ्तार किया है. ये लोग बैंक डिटेल के जरिये बैंकॉक, थाइलैंड, दुबई, हांगकांग और मलेशिया जैसी जगहों का हॉलिडे पैकेज लेते थे .इसके साथ ही वे विदेशी कंपनियों से महंगे सामान भी खरीदते थे. ये लोग ज्यादातर इंटरनेशनल वेबसाइट का इस्तेमाल करते थे क्योकि इन वेबसाइट पर ओटीपी की डिमांड नही की जाती.

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