Tuesday, May 17, 2022

देवबंद और तब्लीगी जमात के झगड़े में अब बांग्लादेश और पाकिस्तान देंगे दखल

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सहानपुर स्थित इस्लामिक शिक्षा संस्थान दारूल उलूम देवबंद और तब्लीगी जमात के बीच चल रहे विवाद में अब बांग्लादेश और पाकिस्तान की एंट्री हो गई है। इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों के प्रमुख उलमा विवाद का निपटारा कराने के लिए 23 जनवरी को भारत पहुंचेंगे।

हजरत निजामुद्दीन में स्थित तब्लीगी जमात के मरकज और इसके अमीर मौलाना साद कांधलवी को लेकर चल रहे विवाद को लेकर कुछ दिन पहले दारुल उलूम कराची में उलमा की बैठक हुई थी। इस मामले में दारुल उलूम के सख्त रुख को देखते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश के उलमा ने भारत आकर विवाद को समाप्त कराने का मन बनाया है। इस बात की पुष्टि दारुल उलूम के एक पदाधिकारी ने की है।

खुफिया विभाग ने भी बांग्लादेश से आने वाले उलमा के दल की पुष्टि की है। जो 23 जनवरी को भारत पहुंचेगा, जबकि पाकिस्तान से आने वाले दल के बारे में उनका कहना है कि जानकारी मिली है कि एक या दो दिन में यह दल भी भारत पहुंच सकता है।

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बता दें कि 18 मार्च 2014 को तब्लीगी जमात के अमीर मौलाना जुबैर के इंतकाल के बाद मौलाना साद ने बिना मैनेजमेंट की अनुमति खुद को जमात का अमीर घोषित कर दिया था। जिसके बाद देवबंद में एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए तब्लीगी जमात पर रोक लगाते हुए छात्रों को उससे दूर रहने के निर्देश दिए।

संस्था के चांसलर मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने शुक्रवार को जारी निर्देशों में कहा है कि दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद कांधलवी पर आरोप लगाया कि वे तब्लीगी जमात के जलसों में इस्लाम धर्म की सही व्याख्या नहीं करते हैं । उन पर आरोप है कि वे मुसलमान कौम को इस्लाम के सही रास्ते से हटाने का काम करते हैं।

इतना ही नहीं मोहतमिम ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दोनों जमातों से दारुल उलूम के जिम्मेदारों का कोई ताल्लुक नहीं है। अगर कोई छात्र जमात की गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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