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25 मई को कोबरापोस्ट के स्टिंग ‘ऑपरेशन 136’ का दूसरा हिस्सा जारी होने के साथ ही देश के कई बड़े मीडिया हाउस नंगे हो गए. जो पैसों के लिए किसी भी हद तक गिर सकते है. हालांकि इस स्टिंग में दो बांग्ला अख़बारों ने पत्रकारिता की लाज रख ली है.

कोबरापोस्ट के रिपोर्टर जब ‘आचार्य अटल’ मीडिया संस्थानों के मुखातिबों से रूबरू हुए तो वे रिपोर्टर की हाँ में हाँ मिलाते हुए दिखाई दिए. लेकिन पश्चिम बंगाल के चर्चित अख़बार बर्तमान पत्रिका के सीनियर जनरल मैनेजर (विज्ञापन) आशीष मुखर्जी और दैनिक संबाद के एक अधिकारी ने साफ़ मना कर दिया.

आशीष मुखर्जी ने करोड़ो के ऑफर के बदले में किसी भी तरह का धार्मिक कंटेंट प्रकाशित करने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कोबरापोस्ट के रिपोर्टर को मीडिया के आदर्श समझाते हुए कहा कि उन्हें यह पूर्व संपादक सेनगुप्ता ने सिखाया था कि यह ‘संस्थान की आत्मा’ के विरुद्ध है.

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उन्होंने कहा कि सेनगुप्ता कहते थे कि आशीष बाबू, वो विज्ञापन, जो खुद (या किसी अन्य के) भगवान, अच्छा या सर्वश्रेष्ठ होने का दावा करते हैं, को छोड़कर आप हर विज्ञापन लेंगे. वहीँ दैनिक संबाद  के अधिकारी ने किसी भी धार्मिक मकसद का कोई भी विज्ञापन प्रकाशित करने से इनकार करते हुए कहते हैं, ‘यही हमारी पालिसी है, ये सभी लोगों के लिए है.’

स मामले पर कोबरापोस्ट की रिपोर्ट कहती हैं, ‘उन्होंने हमारे द्वारा बताए गए संगठन का नाम सुनते ही किसी भी तरह के विज्ञापन से मना कर दिया, जो व्यापारिक मामले में भी मीडिया संस्थान के मूल सिद्धांतों पर टिके रहने को दिखाता है.’ कोबरापोस्ट की रिपोर्ट में दोनों अख़बारों के इस कदम पर आश्चर्य जताया गया है, साथ ही इनकी सराहना भी की गयी है.

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