Sunday, January 23, 2022

उर्दू,फारसी के शब्दों पर रोक, हाईकोर्ट ने कहा – FIR में सरल शब्दों का प्रयोग करे दिल्ली पुलिस

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दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को प्राथमिकी(एफआईआर) में उर्दू या फारसी शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पुलिस को निर्देश दिया था। इस पर अमल हुआ या नहीं। यह पता लगाने के लिए कोर्ट ने अगली सुनवाई तक पुलिस से प्राथमिकी (एफआईआर) की 100 प्रतिया मंगाई थी। साथ ही इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी।

अदालत ने कहा कि प्राथमिकी सरल भाषा में होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की पीठ ने सोमवार को कहा कि पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के दौरान उर्दू और फारसी के शब्दों के इस्तेमाल को रोकना चाहिए, जिनका बगैर सोचे समझे और स्वत: ही इस्तेमाल कर दिया जाता है।

अदालत ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि लोग इन शब्दों को समझ नहीं पाएंगे. पीठ ने कहा कि प्राथमिकी अदालत में बार- बार पढ़ी जाती है और इसलिए इसे सरल भाषा में या प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये पुलिस से संपर्क करने वाले व्यक्ति की भाषा में होनी चाहिए।

उच्च न्यायालय का ये निर्देश एक वकील द्वारा लगाई गई जनहित याचिका (पीआईएल) पर आया। इसमें कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि वह दिल्ली पुलिस को उर्दू या फारसी शब्दों का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दे। इस संबंध में बीस नवंबर को पुलिस ने सभी थानों को एक सर्कुलर भेजा था। इसमें स्पष्ट बताया गया है कि प्राथमिकी दर्ज करते समय इन भाषाओं के बजाए आसान शब्दों का इस्तेमाल किया जाए।

पुलिस ने कोर्ट को उर्दू और फारसी के ऐसे 383 शब्दों की सूची सौंपी है। जिनका थानों में इस्तेमाल बंद हो चुका है। जानकारी सही है या नहीं, ये पता लगाने के लिए कोर्ट ने अलग-अलग थानों से 10-10 एफआईआर की प्रतियां मंगाई थी।

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