बिलकिस बानो केस: सुप्रीम कोर्ट का दोषी पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को गुजरात सरकार निर्देश दिया कि 2002 के बिलकिस बानो मामले में दोषी ठहराए गए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दो सप्ताह के भीतर अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी की जाए.  

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने उच्चतम न्यायालय ने गुजरात सरकार को यह तय करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो सामूहिक बलात्कार मामले की जांच में छेड़छाड़ के लिए हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए.

उच्च न्यायालय ने चार मई 2017 को भारतीय दंड संहिता की धारा 218 (अपनी ड्यूटी का निर्वहन ना करने) और धारा 201 (सबूतों से छेड़छाड़ करने) के तहत पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों को दोषी ठहराया था. इस दौरान बिलकिस बानो ने गुजरात सरकार की पांच लाख रुपये का मुआवजा देने संबंधी पेशकश स्वीकार करने से कोर्ट के समक्ष इनकार कर दिया.

बता दें कि हाई कोर्ट ने चार मई 2017 को आईपीसी  की धारा 218 के तहत अपनी ड्यूटी का निर्वहन ना करने और धारा 201 के तहत सबूतों से छेड़छाड़ करने के तहत पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों को दोषी ठहराया था. इन अधिकारियों ने मुंबई हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2017 को इन अधिकारियों की अर्जी खारिज कर दी थी.

गुजरात में अहमदाबाद के निकट रणधीकपुर गांव में एक भीड़ ने तीन मार्च 2002 को बिलकिस बानों के परिवार पर हमला किया था. इस दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया जबकि उसके परिवार के छह सदस्य किसी तरह उग्र भीड़ से बचकर निकलने में सफल हो गए थे. बिलकिस ने गोधरा ट्रेन जलाए जाने के बाद हुए गुजरात दंगे में अपने परिवार के सात सदस्यों को खोया था.

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