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उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ धाम को मदरसा दारुल उलूम निश्वाह के मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी ने बदरुद्दीन शाह का तीर्थ स्थल करार देते हुए केंद्र की मोदी सरकार से इसे मुसलमानों को सौंपे जाने की मांग की है.

मौलाना ने कहा कि ये तीर्थस्थल हिन्दुओं का नहीं हो सकता, मौलाना के मुताबिक बद्री नाम में बाद में नाथ लगाया गया, लेकिन इससे वो हिन्दू नहीं हो जाते. उन्होंने कहा, सैकड़ों साल पहले बद्रीनाथ धाम बदरुद्दीन शाह या बद्री शाह के नाम से जाना जाता था.

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मौलाना के इस दावे के बाद हिन्दू धर्मगुरु भड़क उठे है. इस बारें में योग गुरु रामदेव ने ट्वीट किया, ‘ऐसे मौलाना बद्रीनाथ धाम के बारे में झूठ फैलाकर इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं, बद्रीनाथ धाम की स्थापना इस्लाम के आने से सैकड़ों साल पहले हुई थी.’

रामदेव के इस बयान के सामने आने के बाद मुस्लिम यूजर ने भी सवाल उठा दिया कि जब बाबरी मस्जिद राम जन्म भूमि हो सकती है तो बद्रीधाम आखिर बदरुद्दीन शाह का तीर्थ स्थल क्यों नहीं ?

ध्यान रहे मदरसा दारुल उलूम निश्वाह देवबंद मसलक की एक संस्था है. जो सहारनपुर में काम करती है.  मुफ्ती अब्दुल लतीफ इस संस्था के वीसी हैं

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