दो निर्दलीय विधायकों ने एचडी कुमारस्वामी की सरकार को दिया समर्थन लिया वापस

6:32 pm Published by:-Hindi News

कर्नाटक: कर्नाटक में मचे सियासी घमासान के तेज होने के आसार नजर आ रहे हैं। मंगलवार को एक निर्दलीय विधायक एच नागेश तथा केपीजेपी पार्टी के विधायक आर शंकर ने राज्य की एचडी कुमारस्वामी नीत जेडीएस-कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। उन्होंने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को भी भेज दी।

दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रामनाथ शिंदे का कहना है कि अगले दो दिनों में कर्नाटक में BJP की सरकार बन सकती है। एच. नागेश का कहना है कि पिछली बार भी कांग्रेस ने उन्हें जबरदस्ती अपने मुंबई में पकड़ लिया था। निर्दलीय विधायक का कहना है कि कांग्रेस और जेडीएस में कोई तालमेल नहीं है, यही कारण है कि हम अपना समर्थन वापस ले रहे हैं। विधायक का दावा है कि कुछ कांग्रेस विधायक भी हैं जो इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।

दूसरी और भारतीय जनता पार्टी के 104 विधायक देश की राजधानी दिल्ली सटे गुरुग्राम के एक रिसॉर्ट में डेरा डाल रखा है। राज्य भाजपा के प्रमुख और पूर्व सीएम बी. एस. येदियुरप्पा (BS Yeddyurappa) ने कहा, ‘जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) भाजपा विधायकों को तोड़ना चाहती है। हम लोग इकट्ठे हैं. हम लोग दिल्ली में अभी एक-दो दिन रुकेंगे।’

वहीं कांग्रेस के पांच विधायक भी लापता बताए जा रहे हैं, कयास लगाए जा रहे हैं कि वे विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। बता दें कि इससे पहले कर्नाटक कांग्रेस विधायकों की तरफ से मुंबई के एक होटल में बीजेपी नेताओं की मुलाकात और खरीद फरोख्त की बात सामने आने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा था कि उनकी सरकार को किसी तरह को कोई खतरा नहीं है।

मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा था कि तीनों ही (कांग्रेस के विधायक) लगातार मेरे संपर्क में हैं। मुझे सूचित करने के बाद वे मुंबई गए। मेरी सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है। मैं जानता हूं कि बीजेपी किनसे संपर्क साधने को कोशिश कर रही है और वे क्या प्रस्ताव दे रहे है। मैं इसे संभाल सकता हूं, मीडिया को क्यों इतनी चिंता है?

आपको बता दें कि कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए 113 विधायकों की जरूरत है। अभी कुमारस्वामी सरकार के पास कांग्रेस के 80 और जेडीएस के 37 यानी कुल 117 विधायक हैं। जबकि 2 निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया है, वहीं बसपा का एक विधायक पहले ही समर्थन वापस ले चुका है।

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