babri masjid

बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव का का प्रमोशन रुक गया है। जिसके चलते उन्होने अब सुप्रीम कोर्ट से गुहार है। वह बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती से संबंधित मुकदमे की सुनवाई कर रहे है।

जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ ने निचली अदालत के जज एसके यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से भी जवाब मांगा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जज एसके यादव की पदोन्नति पर इस आधार पर रोक लगा दी थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले उन्हें इस मुकदमे की सुनवाई पूरा करने का निर्देश दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक जज की पदोन्नति भी रुकी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जज से भी पूछा कि वे किस तरीके से ट्रायल को तय वक्त में पूरा करेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को कहा था कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता आडवाणी, जोशी और उमा भारती पर 1992 के राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप में मुकदमा चलेगा और रोजाना सुनवाई करके इसकी कार्यवाही दो साल के भीतर 19 अप्रैल 2019 तक पूरी की जाएगी।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

मध्यकालीन स्मारक को ढहाने की कार्रवाई को ‘अपराध’ बताते हुये कोर्ट ने कहा था कि ‘इस मामले में कोई नए सिरे से सुनवाई नहीं होगी और न ही मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक संबंधित न्यायाधीश का तबादला ही होगा। मुकदमे की सुनवाई किसी तारीख विशेष पर करना संभव नहीं होने के बारे में न्यायाधीश के निष्कर्ष के अलावा किसी भी अन्य आधार पर स्थगित नहीं की जाएगी।”

जज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि अयोध्या मामले का ट्रायल निपटने तक उनका स्थानांतरण न किए जाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश उनकी प्रोन्नति में आड़े आ रहा है। उन्होंने कोर्ट से आदेश मे बदलाव करने और हाई कोर्ट को उन्हें जिला जज पद पर प्रोन्नति करने का आदेश देने की मांग की है।

Loading...