अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक़ को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान देश की सर्व्वोच अदालत ने आज 42 किताबों का अनुवाद मांगते हुए इस मामले में अगली सुनवाई 14 मार्च को निर्धारित की है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि वह इस मामले को जमीन विवाद के तौर पर देखेंगे. कोर्ट ने सभी पक्षों को दो हफ्ते में दस्तावेज तैयार करने का आदेश दिया, कोर्ट ने साथ ही साफ किया कि इस मामले में अब कोई नया पक्षकार नहीं जुड़ेगा.

इस दौरान बेंच ने कहा कि पहले मुख्य पक्षकारों निर्मोही अखाड़ा, रामलला विराजमान और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की दलीलें सुनेगा. साथ ही राजनीतिक और भावनात्मक दलीलें नहीं सुनी जाएंगी. ध्यान रहे बेंच 13 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है.

इससे पहले  5 दिसंबर, 2017 को कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से देश के राजनैतिक हालात को देखते हुए सुनवाई टालने की गुहार लगाई थी. हालांकि अदालत ने सुनवाई को टालने से इनकार करते हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ताओं के व्‍यवहार को ‘शर्मनाक’ करार दिया था.

यूपी सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले में कुल 504 सबूत और 87 गवाह हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन दस्तावेजों का अनुवाद हुआ है अगर उनमें कोई पौराणिक किताबें या उपनिषद हैं तो उनका भी अनुवाद करके उसकी प्रति कोर्ट में जमा कराई जाए.

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