बाबरी मस्जिद के केस पर पूरी दुनिया की निगाह है। ऐसे में खाड़ी देश के एक अखबार में छपी खबर को लेकर बवाल मच गया। जिसके चलते मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस मसले पर एक बयान जारी करना पड़ा।

दरअसल, गल्फ न्यूज में खबर छपी थी कि राम मंदिर विवाद के मुकदमे में मुस्लिम पक्ष समझौते पर विचार कर रहे हैं। अब बोर्ड ने इस खबर को नकारते हुए साफ कर दिया है कि वह मुकदमा लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी तरह के समझौते की बात नहीं सोची जा रही है।

मध्यस्थता कमेटी से बातचीत पर बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वह इसमें इसलिए शामिल हुआ क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश था। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना वली रहमानी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद के बदले में कोई चीज नहीं ली जाएगी।

firangi mahali

हाल ही में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा था कि उम्मीद पर दुनिया कायम है और मध्यस्थता कमेटी अगर किसी तरह से इस मसले को हल कराने की उम्मीद बना रही है तो इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता कमेटी अगर इस मामले को हल कर दे तो उससे ज्यादा अच्छा कुछ नहीं हो सकता क्योंकि मामला अगर कोर्ट में चला जाएगा तो फिर वहां कितने साल सुनवाई चलेगी, कहा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इसीलिए हम सब सकारात्मक सोच के साथ इंतजार कर रहे हैं कि जब मध्यस्थता कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी तो वह जरूर किसी निर्णय की ओर आगे बढ़ेगी।

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