babri masjid

अयोध्या मामले में गठित सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ का गठन एक बार फिर से होगा।
दरअसल, मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने सुनवाई के लिए गठित की गई संविधान पीठ में जस्टिस यूयू ललित की मौजूदगी पर सवाल उठाने के बाद जस्टिस ने खुद को पीठ से अलग कर लिया।
राजीव धवन का कहना था कि यूयू ललित कल्याण सिंह के वकील रह चुके हैं।

वहीं, गुरुवार को सुनवाई से पहले बाबरी मस्जिद के एक याचिकाकर्ता हाजी महबूब ने संविधान पीठ पर सवाल उठाया था। हाजी महबूब का कहना था कि संविधान पीठ में कम से कम एक मुस्लिम जज होना चाहिए था। उन्होंने मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को सिर्फ एक दिखावा करार दिया था।

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हाजी महबूब ने मीडिया से बातचीत में कहा था, ”आज भी अगर बेंच बनी है तो बेंच में तो.. भई हिंदुस्तान में खाली हिन्दू ही तो हैं नहीं, ये मुसलमान का भी हक है रहने का हिंदुस्तान में.. तो उस तरीके से उनका भी हक होना.. हमारा भी हक होना चाहिए.. एक तो मुसलमान जज होना जरूरी था.. लाजमी था.. तो अगर कोई भी बात होती है तो वो अपना साख रखता कि हां ये होना चाहिए.. ये होना चाहिए.. इसका मतलब मैं तो मानता हूं ये सिर्फ एक दिखावा है.. जो करना है उनको करेंगे.. क्योंकि सामने इलेक्शन है.. 2019 का इलेक्शन है।”

वहीं बाबरी मस्जिद के दूसरे पक्षकार इक़बाल अंसारी ने कहा की अदालत सबूतों के आधार पर फैसला करती है। इसका जाति-धर्म से कोई मतलब नहीं है। हम कोर्ट का सम्मान करते हैं और सभी को करना भी चाहिए।

इसके अलावा राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य व पूर्व सांसद एवं वीएचपी नेता रामविलास वेदांती ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अयोध्या में श्रीराम का जन्म हुआ यह बात सभी ग्रंथों में है। अयोध्या में बाबर कभी नहीं आया था, यह इतिहास कहता है। अयोध्या में बाबर ने मीर बांकी के द्वारा मंदिर तुड़वाया था, लेकिन मंदिर के चौदह कसौटी खम्बे बचे थे।

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