SC के फैसले का इंतजार, बाबरी के मुद्दई बोले- तोड़ने के बाद भी वह जगह मस्जिद ही कहलाएगी

11:50 am Published by:-Hindi News
babri masjid

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को अहम फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि 1994 के संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है या नहीं। फैसले में कहा गया था कि मस्जिद में नमाज इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। इस फैसले का लंबे वक्त से इंतजार है।

फैसले से पहले बाबरी मस्जिद में मुद्दई इकबाल अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, हमें मंजूर है। मस्जिद में मूर्ति रखी गई, मस्जिद तोड़ी गई, फैसला कोर्ट को सबूतों के बुनियाद पर करना है।  उन्होंने कहा कि मस्जिद इस्लाम का एक अंग है। मस्जिद तोड़ दी गई, अब अगर नमाज जमीन पर बैठकर की जाएगी तो वह जगह मस्जिद ही कहलाएगी।

उन्होने कहा, मस्जिद की जमीन ना किसी को दी जा सकती है और ना बेची जा सकती है। वह हमेशा मस्जिद ही कही जाएगी। हम कोर्ट पर विश्वास करते हैं। कानून पर विश्वास करते हैं। कोर्ट फैसला करे। इधर करे या उधर करे, क्योंकि इसके पहले इस पर इतनी राजनीति की जा चुकी है।

वही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी का कहना है कि आज के फैसले से जमीनी विवाद पर मालिकाना हक को लेकर जो मामला है, उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हां, इतना जरूर है कि आज के फैसले से बाबरी मस्जिद व राम जन्म भूमि विवाद की सुनवाई में तेजी जरूर आएगी। उन्होंने कहा कि यह नहीं लगता कि 2019 से पहले इस मामले में फैसला आ सकता है।

बता दें कि मुस्लिम पक्षकारों की ओर से दलील दी गई है कि 1994 में इस्माइल फारुकी केस में सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा है कि मस्जिद में नमाज पढना इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है। उन्होंने कहा है कि ऐसे में इस फैसले को दोबारा परीक्षण की जरूरत है और इसी कारण पहले मामले को संवैधानिक बेंच को भेजा जाना चाहिए।

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