भारत के सबसे अमीर मुसलमान और देश के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति अजीम प्रेमजी 24 जुलाई, 2018 को 73 वर्ष के हो गए। अजीम प्रेमजी को अपनी सादगी भरे जीवन और दानवीरता के लिए जाने जाता हैं। वे अब तक अपनी 27 हजार करोड़ से ज्यादा की प्रापर्टी दान कर चुके हैं।

भारत के बिल गेटस कहलाने वाले अजीम हाशिम प्रेमजी का जन्म 24 जुलाई 1945 को मुंबई के एक गुजराती मुस्लिम परिवार में में हुआ था, उनके पिता को ‘राईस किंग’ कहा जाता था। विभाजन के बाद जब जिन्ना ने उनके पिता मुहम्मद हाशिम प्रेमजी को पकिस्तान आने के लिये आमंत्रित किया था। उन्हें तब की पाकिस्तानी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी संभालने का भी ऑफर दिया था। लेकिन उन्होंने पाक कायदे आजम का ऑफर यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि वह एक हिंदुस्तानी हैं और भारत में ही रहेंगे।

मुहम्मद हाशिम प्रेमजी ने 1945 में वेस्टर्न इंडियन वेजिटेबल प्रोडक्ट लिमिटेड की स्थापना की थी, जो आज विप्रो के नाम से जानी जाती है। 67 देशों में विप्रो का 1 हजार अरब रुपये से ज्यादा का कारोबार फैला हुआ है। उनकी सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो में सवा लाख से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत हैं।

2005 में भारत सरकार ने प्रेमजी को तीसरे सर्वोच्च सम्मान पद्मभूषण से नवाजा था। 2011 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से नवाजा गया। प्रेमजी ने जनवरी 2001 में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की स्थापना की थी। यह देशभर में स्कूलों को बेहतर बनाने का काम करता है।

प्रेमजी की पत्नी का नाम यास्मीन हैं, उन्हें दो बच्चे है, रिषद और तारिक, रिषद फिलहाल विप्रो के आईटी व्यापार के चीफ स्ट्रेटजी ऑफिसर है। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अजीम प्रेमजी ने बताया था कि उनके पिता का देहान्त 51 वर्ष की उम्र में हो गया था। पिता ने उन्हें पढा़ई के लिए अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी भेजा था, लेकिन उस अप्रिय घटना के बाद मां ने उन्हें फोन किया और वापस बुला लिया। आते ही उन्हें कारोबार संभालना पड़ा। तब वह केवल 21 साल के थे।