अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई को 8 फरवरी 2018 तक के लिए टाल दिया है. हालांकि इस दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को अनुवाद किए गए 19950 पन्नों के दस्तावेज जल्द से जल्द जमा कराने का आदेश दिया है.

दरअसल कोर्ट ने ये सुनवाई सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल की उस मांग पर टाली है. जिसमें उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के 2014 के घोषणापत्र में शामिल है, कोर्ट को बीजेपी के जाल में नहीं फंसना चाहिए.  ऐसे में अदालत को 2019 के आम चुनाव के बाद सुनवाई करनी चाहिए.

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साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट को देश में गलत संदेश नहीं भेजना चाहिए, बल्कि एक बड़ी बेंच के साथ मामले की सुनवाई करनी चाहिए. देश का माहौल अभी ऐसा नहीं है कि इस मामले की सुनवाई सही तरीके से हो सके. उन्होंने कहा, मामले की सुनवाई 5 या 7 जजों बेंच के जरिए की जानी चाहिए.

सिब्बल ने आगे कहा कि अयोध्या में हुई खुदाई पर एएसआई की पूरी रिपोर्ट भी अभी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनी है. सभी पक्षों की तरफ से अनुवाद करवाए गए कुल 19950 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में औपचारिक तरीके से जमा होने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के सामने वह सारे दस्तावेज नहीं लाए गए हैं जो इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने रखे गए थे.

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए निर्देॆशों का पालन करते हुए यूपी सरकार ने मामले से जु़ड़े दस्तावेजों का अंग्रेजी अनुवाद पेश किया है. ये दस्तावेज 8 अलग-अलग भाषाओं में थे.

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