Monday, January 24, 2022

अयोध्या केस में मुस्लिम पक्ष की दलील – निर्मोही अखाड़ा ने चबूतरे पर गैरकानूनी कब्जा किया..

- Advertisement -

अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद की उच्चतम न्यायालय में आज 21वें दिन सुनवाई हुई। इस दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने कहा कि संविधान पीठ को दो मुख्य बिन्दुओं पर ही विचार करना है। पहला विवादित स्थल पर मालिकाना हक किसका है और दूसरा क्या गलत परंपरा को जारी रखा जा सकता है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष हिंदू पक्ष के दावे पर सवाल उठाते हुए धवन ने कहा, “क्या रामलला विराजमान कह सकते हैं कि उस जमीन पर मालिकाना हक़ उनका है? नहीं, क्‍योंकि उनका मालिकाना हक़ कभी नहीं रहा है।”

babri masjid

धवन ने 1962 में दिए गए शीर्ष अदालत के एक फैसले का हवाला देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि जो गलती पहले हो चुकी है, उसे जारी नहीं रखा जाना चाहिए। उन्‍होंने दलील दी कि यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि जमीन पहले हिन्दू पक्षकारों के अधिकार में थी, जो सही नहीं है।

धवन ने आगे कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने गैरकानूनी कब्जा चबूतरे पर किया, उस पर मजिस्ट्रेट ने नोटिस कर दिया जिसके बाद से न्यायिक समीक्षा शुरू हुई और एक ‘गलत’ नोटिस के चलते आज शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही है।

राजीव धवन ने निर्मोही अखाड़े के मुकदमे का विरोध करते हुए कहा कि सेवादार के अलावा अन्य संबधित चीजों पर उनका दावा नहीं हो सकता है क्योंकि वो उनके मालिक नहीं है। वो सिर्फ सेवादार हैं। ट्रस्टियों और सेवादार में अंतर है।

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles