सिडनी | ऑस्ट्रेलिया में अस्थायी तौर पर काम कर रहे करीब 95 हजार विदेशी नागरिको की नौकरी पर तलवार लटक गयी है. ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने उस वीजा कार्यक्रम को खत्म करने का फैसला किया है जिसके तहत विदेशी नागरिक ऑस्ट्रेलिया में अस्थायी तौर पर काम करने के पात्र माने जाते थे. इस कार्यक्रम को 457 वीजा नाम दिया गया था. सरकार के इस फैसले से सबसे ज्यादा भारतीय प्रभावित होंगे.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल ने इसकी घोषणा करते हुए कहा की हम आव्रजन देश है लेकिन ऑस्ट्रेलियाई कामगारों को अपने देश में रोजगार के लिए प्राथमिकता मिलनी चाहिए. इसलिए हम 457 वीजा कार्यक्रम को खत्म कर रहे है. इसी वीजा के जरिये विदेशी नागरिक अस्थायी कर्मचारी के तौर पर हमारे दश में आते है. हम 457 वीजा कार्यक्रम को रोजगार के पासपोर्ट के तौर पर अनुमति नही दे सकते.

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टर्नबुल ने आगे कहा की देश के रोजगार पर सबसे पहला हक़ ऑस्ट्रेलिया के लोगो का है. हम एक नए वीजा कार्यक्रम को लेकर आयेंगे जो यह सुनिश्चित करेगा की विदेशी कर्मचारी केवल उन क्षेत्रो में काम करने के लिए आये जहाँ कुशल क्रमिको की कमी है. इसीलिए न आयें कि नियोक्ता के लिए ऑस्ट्रेलियाई कामगारों के बजाए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना आसान है.

457 वीजा कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलिया कंपनी को यह इजाजत दी गयी थी की वो चार साल तक के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकते है. लेकिन यह नियुक्ति केवल उन्ही क्षेत्रो में की जा सकेगी जहाँ कुशल ऑस्ट्रेलियाई कामगारों की कमी है. एक आंकड़ो के मुताबिक अभी ऑस्ट्रेलिया में करीब 95 हजार लोग इस वीजा कार्यक्रम के तहत काम कर रहे है. जिनमे पहले नम्बर पर भारतीय और फिर ब्रिटेन और चीन का नम्बर आता है.

मालूम हो की अभी कुछ दिनों पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल भारत दौरे पर आये थे. यहाँ उन्होंने भारत सरकार के साथ कई अहम् समझौते पर हस्ताक्षर किये. इसके अलावा उन्होंने मोदी के साथ मेट्रो का सफर किया और दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में दोनों समकक्ष बेहद तन्मियता से मिलते जुलते दिखाई दिए. इस दौरान मोदी ने उनके साथ सेल्फी भी ली. लेकिन ऑस्ट्रेलिया लौटते ही टर्नबुल ने इतना बड़ा फैसला ले लिया.

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