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महाराष्ट्र का औरंगाबाद शहर शुक्रवार रात से सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहा है. दो पक्षों में हुए उग्र विवाद के चलते एक नाबालिग सहित दो लोगों की मौत हो गई है. जबकि पचास से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे है.

सांप्रदायिक हिंसा शहर के गांधीनगर, राजाबाजार और शाहगंज इलाकों में फैली हुई है. हिंसा पर काबू पाने के लिए औरंगाबाद के पुराने हिस्से में बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है और धारा 144 लागू कर दी गई है.  मोबाइल, इंटरनेट सेवाएं अगले आदेश तक बंद कर दी गई हैं.

हिंसा में मारा गया नाबालिग मोहम्मद हारिस दसवीं क्लास में पढ़ता था. परिजनों के अनुसार, उनका बेटा गोलीबारी में मारा गया. वह बड़ा होकर इंजीनियर बनना चाहता था. पुलिस ने अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया है.

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हिंसा में एसीपी गोवर्धन कोलेकर सहित कम से कम 10 पुलिसकर्मी भी बुरी तरह घायल बताए जा रहे है. इसके अलावा पुलिस स्टेशन के चीफ हेमंत कदम और इंस्पेक्टर श्रीपद परोपकारी भी घायल हुए हैं.

पुलिस का कहना है कि अब तक यह पता नहीं चल सका है कि हिंसा किस बात को लेकर भड़की. कहा जा रहा है कि अवैध रूप से लगाई गई पानी की पाइप लाइन काटने में भेदभाव के चलते यह झगड़ा शुरू हुआ. वहीं व्यावसायिक वर्चस्व की बात भी सामने आ रही है.

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