देश भर में गौररक्षा के नाम पर पहले देश के अल्प्संखयक समुदाय को हिंसा का शिकार बनाया गया जो अभी जारी है. ऐसे में अब इन आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है.

पहलू खान के मामले में गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि वरिष्ट अधिवक्ता प्रशांत भूषण न कहा कि ‘गो-रक्षक’ के नाम से इस देश में गुंडों की एक फौज तैयार की गई है. ये गुंडे सरकारी शह पर ख़ास तौर पर भाजपा शासित राज्यों में काम कर रहे हैं. पुलिस भी इनके साथ काम करती है.

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इस दौरान उन्होंने केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा को निशाने पर लिया और कहा कि महेश शर्मा किस तरह का अस्पताल चला रहे हैं. उन्होंने कैसे डॉक्टर रख लिए हैं. आख़िर उनके डॉक्टरों ने कैसे लिख दिया कि पहलू खान की मौत हार्ट-अटैक से हुई है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ़-साफ़ सबकुछ लिखा हुआ है कि कहां-कहां उनकी हड्डी टूटी हुई थी. प्रशांत भूषण ने तत्काल उनका लाइसेंस रद्द करने की मांग भी की.

उन्होंने कहा कि एक तरफ़ जहां पुलिस हमलावरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई से बचती है वहीं ज़्यादातर मामलों में उन लोगों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए हैं जो ख़ुद पीड़ित रहे हैं.

वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि वह पहलू खान के मामले में प्रोटेस्ट पेटिशन डालेंगी. उन्होंने कहा कि, गोरक्षा पर नाम पर किए गए तमाम हत्याओं के मामलों को एक साथ जोड़कर अदालत जाने की ज़रूरत है.