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अलीगढ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर सियासी घासमान मचा हुआ है। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने के प्रबल समर्थक थे।

यूनिवर्सिटी के पूर्व पीआरओ और उर्दू अकादमी के डायरेक्टर डॉ. राहत अबरार ने टीओआई को बताया कि अटल जी ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को समर्थन दिया था। यहां तक कि उन्होंने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने पर यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को बरकरार रखेंगे।’

उन्होने कहा, 1979 में मध्य अवधि के चुनावों के दौरान, घोषणापत्र में लिखा था, ‘यूनिवर्सिटी को स्वायत्तता और इस्लामिक स्टडी के लिए संस्थान का मूल दर्जा देने के लिए जनता पार्टी उपयुक्त कानून को अमल करने की प्राथमिकता देगी।’

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इस बात का उल्लेख भारतीय जनसंघ (1952-1980) के एक दस्तावेज में मिलता है। पार्टी ने 1979 में प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था। इस समय एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप का जो मामला है, उसका हल उसी बिल में है। अबरार ने बताया, ‘तब जनता पार्टी के उपाध्यक्ष राम जेठमलानी ने एएमयू को अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी का दर्जा देने के लिए प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया था।’

एएमयू के विधि विभाग के प्रो. शकील समदानी ने बताया कि जनता पार्टी की सरकार में एएमयू के अल्पसंख्यक स्वरूप को बहाल करने की कोशिश की गई थी। एक सदन से बिल पास भी हो गया था। दूसरे सदन में बिल पास होना था, तब तक सरकार गिर गई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी इस बिल के पक्ष में थे।

उन्होने कहा कि अटलजी अच्छे राजनेता व कवि थे। उन्होंने ऐसे मुद्दों पर आजाद राय रखी, जो पार्टी की विचारधारा से मेल नहीं खाते थे। पीएम रहते उन्होंने ईमानदारी से राजधर्म निभाने कोशिश की। बता दें कि 2016 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया जा सकता है।

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