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रिश्वत के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में मचे बवाल के बाद अब ये संकट सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को झटका देते हुए फैसला सुनाया है कि अब हटाए गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ मामले की जांच सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) करेगी।

कोर्ट के फैसले के मुताबिक यह जांच सीवीसी को महज दो हफ्ते में पूरी करनी होगी और खुद सुप्रीम कोर्ट सीवीसी की जांच की निगरानी करता रहेगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सीबीआई में कोई भी बड़ा अथवा नीतिगत फैसला करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट के आदेश के बाद नागेश्वर राव महज रूटीन काम करेंगे।

हालांकि सीबीआई में पहली बार ऐसा मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी सीबीआई निदेशक त्रिनाथ मिश्रा को पद से हटाया जा चुका है। बात नवंबर 1998 की है, जब सीबीआई की टीम ने धीरूभाई अंबानी की कंपनी रिलायंस के ठिकानों पर छापेमारी की थी। 19 नवंबर, 1998 को सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर डीएल लाल की निगरानी में मुंबई के पॉस इलाके कफ परेड भवन और दिल्ली के ली मरेडियन होटल पर एकसाथ छापा मारा गया था।

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हालांकि, अंबानी परिवार को पहले ही इस रेड की भनक लग गई थी क्योंकि 21 दिनों पहले ही सीबीआई ने दिल्ली में रिलायंस के बड़े अधिकारी सुब्रमण्यम के ठिकानों पर भी रेड मारी थी। ये छापेमारी ऑफिशियल सेक्रेट से जुड़ा था। सीबीआई इस बात की तहकीकात कर रही थी कि क्या भारत सरकार से जुड़ी कोई फाइल रिलायंस के दफ्तर में है या नहीं। सीबीआई को इसकी सूचना मिली थी कि सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी फाइल रिलायंस के पास है।

छापेमारी के बाद सीबीआई की तरफ से दावा किया गया था कि पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े कागजात बरामद हुए हैं। हालांकि, रिलायंस सीबीआई रेड से इनकार करता रहा लेकिन बाद में उसने भी यह बात कबूल कर ली थी कि हां, उसके ठिकानों पर सीबीआई रेड पड़ी थी। जब रिलायंस के ठिकानों पर सीबीआई ने रेड मारी थी, तब धीरूबाई अंबानी ने सीधे पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को फोन लगा दिया।

तब धीरूभाई अंबानी ने पीएम से शिकायत की थी कि ऑफिशियल सेक्रेट एक्ट का मामला गृह मंत्रालय के तहत आता है तो फिर पीएमओ और डीओपीटी के तहत आने वाली सीबीआई ने कैसे उसके ठिकानों पर रेड मारी? इस छापेमारी से पहले त्रिनाथ मिश्रा ने सरकार को विश्वास में नहीं लिया था। इसके चंद दिनों बाद मिश्रा को पद से हटा दिया गया था।

जून 2013 में ओपेन मैग्जीन में छपे एक लेख के मुताबिक तब त्रिनाथ मिश्रा ने लिखा था कि उन्हें कहा गया था कि इस केस में ऐसा कीजिए। जब उन्होंने मना किया था तो कहा गया था कि देख लीजिए। बतौर मिश्रा, उन्होंने आखिरकार ये कहा कि मुझसे ऐसा नहीं होगा माफ कीजिए। इसके बाद उनकी सीबीआई डायरेक्टर पद से छुट्टी कर दी गई थी।

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