असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के दूसरे एवं अंतिम मसौदा को आज यानी सोमवार को जारी कर दिया गया है। जिसमे 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.90 करोड़ वैध नागरिक घोषित किया गया है। यानि की  40 लाख लोगों को अवैध घोषित किया गया है।

 

एनआरसी का कहना है कि यह सिर्फ मसौदा है, अंतिम सूची नहीं है। उसका कहना है कि जो लोग छूट गए हैं वे दावा पेश कर सकते हैं और इस पर सवाल उठा सकते हैं। हाजेला के मुताबिक, एनआरसी में उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ होंगे जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं।

 

केंद्र सरकार ने राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों की 220 कंपनियों को तैनात किया है। राज्य के 7 जिलों- बारपेटा, दर्रांग, डीमा हासो, सोनितपुर, करीमगंज, गोलाघाट और धुबरी में निषेधाज्ञा लागू की गई है।

राज्य सरकार ने कहा कि मसौदा में जिनके नाम मौजूद नहीं होंगे उनके दावों की गुंजाइश होगी। उन्हें (महिला/पुरूष) संबंधित सेवा केंद्रों में निर्दिष्ट फॉर्म को भरना होगा। यह फॉर्म 7 अगस्त से 28 सितंबर के बीच उपलब्ध होंगे। इसके बाद अगले कदम के तहत उन्हें अपने दावे को दर्ज कराने के लिए अन्य निर्दिष्ट फॉर्म भरना होगा, जो 30 अगस्त से 28 सितंबर तक उपलब्ध रहेगा।

 

राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी इसे लेकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं बताया है। उन्होंने कहा कि असम सरकार एनआरसी सूची में नाम ढूंढने में लोगों की मदद करेगी। बता दें कि असम में एनआरसी का पहला ड्राफ्ट दिसंबर 2016 में जारी हुआ था।. पहले ड्राफ्ट में 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे।

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