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नई दिल्ली । देश के उत्तर पूर्वी राज्य असम में ज़बरदस्त तनाव पसरा हुआ है। एक तरफ़ जहाँ पूरा देश नए साल का जश्न मना रहा है वही असम राज्य के लोग एक नई दुविधा में फँसे हुए है। ये लोग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है क्योंकि सप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य में नैशनल रेजिस्टर ओफ़ सिटिज़ेन जारी किया जा रहा है। जिन जिन लोगों का नाम इस रेजिस्टर में होगा वह भारत का नागरिक माना जाएगा।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है की जिन लोगों का नाम इस रेजिस्टर में नही आएगा उनका क्या भविष्य है? इन सब सवालों के बीच ही राज्य सरकार ने पहली लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में क़रीब 1 करोड़ 90 लाख लोगों का नाम है जबकि 1 करोड़ 39 लाख लोग अभी भी अपने नाम का इंतज़ार कर रहे है। फ़िलहाल पहली लिस्ट जारी होने के साथ ही राज्य में तनाव की स्थिति है।

किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की कई टुकड़ियों को वहाँ तैनात किया गया है। जबकि केंद्र सरकार भी लगातार राज्य सरकार से सम्पर्क में है। मिली जानकारी के अनुसार पहली लिस्ट जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अफ़वाहें फैलाई जा रही है। फ़िलहाल सरकार सोशल मीडिया पर लगातार नज़र गड़ाए हुए है। कई आपत्तिजनक पोस्ट को ब्लाक किया गया है।

उन लोगों पर भी नज़र रखी जा रही है जो अफ़वाहें फैला रहे है। बता दे की असम में अवैध तौर पर रहने वाले बांगलादेशियो का मुद्दा काफ़ी सालों से चल रहा है। चुनावों में भाजपा ने इस मुद्दे पर ख़ूब प्रखर होकर बोला था। हालाँकि अभी तक राज्य सरकार की और से इस और कोई कड़े क़दम नही उठाए गए। अब सप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार को नैशनल रेजिस्टर ओफ़ सिटिज़ेन का ड्राफ़्ट तैयार करना पड़ा। इस रेजिस्टर में जिन लोगों का नाम आएगा वही भारतीय नागरिक होगा।

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