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राजस्थान के राजसमंद में मुस्लिम बुजुर्ग मुहम्मद अफ्जरुल की निर्मम हत्या के मामले में सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय  ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर 6 दिसम्बर का ही दिन क्यों चुना गया.

अरुणा रॉय ने कहा, आरोपित शंभुलाल रैगर ने 6 दिसंबर का दिन भी इसलिए चुना है क्योंकि वह विवादित ढांचा ढहाने की घटना को भी अपने कुकृत्य से जोड़ना चाहता था. ध्यान रहे 6 दिसंबर 1992 को भगवा संगठनों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को शहीद किया था.

उन्होंने कहा कि राजस्थान की सरकार मुसलमानों पर दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हमलों को रोकने में पूरी तरह असफल है. ऐसी घटनाओं से यही प्रतीत होता है कि यहां कानून नाम की कोई चीज ही नहीं है. पिछले 9 महीने में यह चौथी घटना है, जिसमें नफरत और फासीवादी सोच के चलते किसी व्यक्ति की हत्या की गई है.

सामजिक कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो बहुत छोटी-छोटी बातों पर तो तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, वे आज कुछ नहीं बोल रहे.

ध्यान रहे शंभूलाल रेगर नाम के शख्स ने अफरजुल की तलवार से काट कर हत्या कर दी थी. इस दौरान उसने उसने हैवानियत की हदे पार करते हुए न केवल अफरजुल पर कुल्हाड़ी से 25 से ज्यादा वार किये बल्कि उसकी गर्दन काटने के बाद तडपते हुए उसे पेट्रोल डाल कर जलाया.

उसने इस पूरी वारदात का उसने वीडियो भी वायरल किया. जिसमे वह मुस्लिमों को ललकारते हुए कह रहा है कि ”ये तुम्हारी हालत होगी… ये लव जिहाद करते हैं हमारे देश में… हमारे देश में ऐसा करोगे तो हर जिहादी की हालत ऐसी ही होगी… जिहाद खत्म कर दो…”

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