Wednesday, January 19, 2022

अयोध्या मामले पर सूप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर कह डाली बड़ी बात, अभी पढ़ें

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भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधानों पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा ने मंगलवार को उस सोशल मीडिया कैम्पेन और आर्टिकलों पर कड़ी आपत्ति जाहिर की, जिसमें उन्हें 5 जजों की संवैधानिक पीठ से हटाए जाने की मांग की जा रही है।

मंगलवार को जस्टिस अरुण मिश्रा ने इसे अदालत का अपमान बताया। उन्होंने कहा, “मेरा विवेक स्पष्ट है, मेरी ईमानदारी ईश्वर के सामने स्पष्ट है, मैं नहीं हटने वाला।” उन्होने ये भी कहा, ‘यदि इस संस्थान की ईमानदारी दांव पर होगी तो मैं त्याग करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा। मैं पूर्वाग्रही नहीं हूं और इस धरती पर किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होता हूं। यदि मैं इस बात से संतुष्ट होऊंगा कि मैं पूर्वाग्रह से प्रभावित हूं तो मैं स्वयं ही इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लूंगा।’

जस्टिस मिश्रा ने कहा- मेरे नजरिए के लिए मेरी आलोचना की जा सकती है। हो सकता है कि मैं कोई हीरो नहीं, हो सकता है कि मैं कलुषित व्यक्ति हूं। लेकिन, जब तक मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि मेरी अंतर आत्मा साफ है और मेरी ईमानदारी भगवान के सामने स्वच्छ है, मैं हटूंगा नहीं। अगर मुझे लगा कि मैं किसी भी बाहरी तत्व से प्रभावित हो जाऊंगा, तो मैं पहला व्यक्ति रहूंगा जो यहां से हटेगा। सवाल यह है कि क्या मैं संविधान पीठ में नहीं बैठ सकता हूं, जबकि हम ही वो लोग थे, जिन्होंने यह मामला बड़ी बेंच के पास भेजा था। यह फैसले के खिलाफ अपील नहीं है, जिसमें मैं कोई पार्टी हूं। अगर मुझे समझाया जा सकता है तो मैं अपना नजरिया सुधार लूंगा।

गौरतलब है कि उनकी यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की अपील पर थी, जिसमें दीवान ने कहा था कि अगर मिश्रा मामले (भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधान की व्याख्या) की सुनवाई करते हैं तो कुछ गड़बड़ हो सकती है।

जस्टिस मिश्रा ने पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का नेतृत्व कर रहे हैं। इस संविधान पीठ में जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एस रविंद्र भट शामिल हैं। इन सभी न्यायमूर्तियों पर भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजे एवं पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास अधिनियम 2013 ( भूमि अधिग्रहण कानून 2013) के सेक्शन 24 के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दो परस्पर विरोधी फैसलों को सही करने का जिम्मा है।

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