नई दिल्ली | आरबीआई ने बुधवार को नोटबंदी से सम्बंधित पहले आंकड़े देश के सामने रखे. आरबीआई ने बताया की नोट बंदी के बाद करीब 99 फीसदी पैसा वापिस बैंकिंग सिस्टम में आ गया. आंकड़ो के अनुसार नोट बंदी से करीब 15.44 लाख करोड़ रूपए की करेंसी चलन से बाहर हो गयी थी. जबकि 15.28 लाख करोड़ रूपए वापिस बैंकिंग सिस्टम में आ गए. आरबीआई के आंकड़ो के बाद मोदी सरकार बेकफूट पर आ गयी है.

क्योकि इन आंकड़ो से साफ़ है की नोट बंदी फेल हो चुकी है. वही विपक्ष भी लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रुख अपनाए हुए है. चारो तरफ से हो रहे हमलो के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली सामने आये. उन्होंने नोट बंदी के असल उद्देश्यों को गिनाते हुए कहा की नोट बंदी से हमने इन उद्देश्यों को प्राप्त किया है. हम सही ट्रैक पर है. उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा की जिन्होंने कभी कालेधन के खिलाफ लड़ाई नही लड़ी वो नोट बंदी के पुरे उद्देश्यों को नही समझ सकते.

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अरुण जेटली ने कहा की नोट बंदी का उद्देश्य नकद लेन देन को कम करना था, कालेधन और भ्रष्टाचार पर चोट करना था, टैक्स दायरा बढ़ाना था. ये सब हमने प्राप्त किया है. देश में टैक्स बेस बढ़ा है, आतंकवादियों और नक्सलियों पर इसका असर पड़ा है. वही नकद लेन देन की बात करे तो पिछले साल के मुकाबले इस साल 17 फीसदी नकदी का आदान प्रदान कम हो गया है. हमारा उद्देश्य किसी का पैसा जब्त करना नही था बल्कि छुपे हुए पैसे को बैंकिंग सिस्टम में लाना था.

जेटली ने आगे कहा की जो लोग कालेधन की लड़ाई कभी नही लडे वो ही नोट बंदी को फेल बता रहे है. वो कभी नोट बंदी का उद्देश्य समझ ही नहीं पाए. हालाँकि जेटली तर्को के आधार पर नोट बंदी को सही ठहराने पर लगे हुए है लेकिन नोट बंदी के समय प्रधानमंत्री मोदी ने जिन जिन उद्देश्य को गिनाया था उनमे से कोई भी पूरा नही हुआ है. हालाँकि उस समय भी गोल पोस्ट रोज बदले गए.

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