Sunday, October 17, 2021

 

 

 

भड़काऊ भाषण पर अरुण जेटली के बयान क्या बीजेपी व संघ नेताओं पर भी लागु है?

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शैक्षिक संस्थान से सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए आपको परचा लिखना पड़ता है लेकिन देशभक्ति के सर्टिफिकेट पाने के लिए बस आपको दो काम करना होगा। पहले तो आरएसएस को खुश करने वाले चार-छे ट्वीट करिये और दूसरा सत्ता में बैठी बीजेपी के खिलाफ न बोलिए। 
 विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया की बात करे तो गूगल पर उनका नाम डालते ही भड़काऊ भाषणो की लम्बी फेहरिस्त खुल जाती है। तो क्या अल्पसंख्यकों और दलितों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देना ही राष्ट्रवाद है। सोने पर सुहागा तो यह के आज तक उनके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाई नहीं की गयी है।
हाल ही में संसद सत्र के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली जब जेएनयू मामले पर बोल रहे थे तो उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जिससे लोगों के होश उड़ गए। जेटली ने कहा “भड़काऊ भाषण को अभिव्यक्ति की आज़ादी के श्रेणी में नहीं ला सकते हैं।” सियासी पार्टियां और देश की जनता कंफ्यूज हो गयी की मंत्री जी ऐसा क्यों बोल रहे हैं क्यूंकि उनकी अपनी बीजेपी में भड़काऊ भाषण देने वाले भरे पड़े हैं।
ऐसा बयान उन्होंने विपक्ष को लताड़ते हुए दिया था क्यूंकि वह जेएनयू मामले में सरकार की कार्यवाई पर सवाल उठा रहे थे।  विपक्ष शायद यहाँ थोड़ा चूक गया के मंत्री जी तब ऐसे बयान क्यों नहीं देते जब बीजेपी नेता साध्वी प्राची, योगी आदित्यनाथ, गिरीश सिंह, सुब्रमण्यम स्वामी, आदि भड़काऊ भाषण देते है।
जेएनयू के एक फ़र्ज़ी वीडियो पर मंत्री जी ऐसा बयान दे रहे हैं लेकिन जब खुलेआम देश के नागरिकों को मरने व पाकिस्तान भेजने की बात होती है तो उनके होंठ क्यों सील से जाते हैं। यहाँ तक प्रधान मंत्री अपने रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” हर भारतीय की मन की बात कभी नहीं रखे।
अपने बयान में जेटली ने सवाल उठाया की “क्या हम उस विचारधारा को सम्मान तो नहीं दे रहे हैं जो देश को तोड़ने की है?” बेशक देश को तोड़ने वाली विचारधारा का सम्मान गलत है लेकिन सवाल यह है क्या की जेटली को ऐसा सिर्फ जेएनयू मामले में महसूस क्यों हुआ उनको ऐसा तब क्यों नहीं लगता जब बीजेपी नेता गिरीश सिंह मुसलमानो को पाकिस्तान भेजने की बात करते हैं, उनको योगी आदित्यनाथ, साध्वी प्राची, प्रवीण तोगड़िया जैसे नेताओं की विचारधारा देश को तोड़ने वाली क्यों नज़र नहीं आती।
जेटली अब संघ परिवार के समर्थक नहीं बल्कि देश  के वित्त  मंत्री हैं और  उन्हें सभी को एक  ही  चश्मे से देखना होगा। देखने वाली बात अब यह होगी के मंत्री जी का यह बयान अब उन नेताओं पर भी लागू होगा जो भड़काऊ भाषण देते है या फिर सिर्फ हवाई फायर। – हुज्जत रज़ा (hindkhabar)
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