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दलित नेता प्रकाश आंबेडकर ने कोरेगांव हिंसा मामले में वामपंथी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य दक्षिणपंथी संगठन ‘‘सनातन संस्था’’ के खिलाफ जांच से ध्यान भटकाना है।

उन्होंने कहा कि भाजपा नीत सरकार सनातन संस्था के खिलाफ चल रही जांच से ध्यान भटकाना चाहती है, इसलिए ये छापे मारे गए। उन्होने ये भी कहा कि भीमा – कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही पुणे ग्रामीण पुलिस ने संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, ये दोनों लोग आक्रामक दक्षिणपंथी रूख रखने को लेकर जाने जाते हैं। इन दोनों ने कथित तौर पर हिंसा को उकसाया था।

आंबेडकर ने आगे कहा, “लेकिन विश्रमबागवाड़ा पुलिस स्टेशन (पुणे शहर में) के अधिकारी पुणे में यल्गार परिषद के साथ ‘शहरी माओवादी’ कनेक्शन का संकेत दे रहे हैं, जिसमें कई वामपंथी विचारधारा के अनुयायियों ने हिस्सा लिया था। अब जांच एजेंसी संकेत दे रही हैं कि यल्गार परिषद ने हिंसा को भड़काया था।

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आंबेडकर ने कहा कि सरकार के खिलाफ जो आवाज उठा रहे हैं, वे गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) और गैर राजनीतिक संगठन हैं लेकिन उनकी जड़ें जनसमूह में है। उन्होंने कहा, ‘‘इन छापों के साथ सरकार जनसमूह को खामोश करने की कोशिश कर रही है लेकिन मुझे संदेह है कि क्या गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चुप होंगे। वे सरकार का विरोध करने में कहीं अधिक सक्रिय होंगे क्योंकि उनका कोई हित नहीं जुड़ा हुआ है।’’

पूर्व सांसद ने कहा, ‘‘वे लोग चुनाव नहीं लड़ते। उनकी रूचि सिर्फ यह देखने में है कि लोकतंत्र और मानवाधिकारों की देश में हिफाजत हो। यह उनका मकसद है। वे लोग पहले की तुलना में कहीं अधिक सक्रिय होंगे।’’

उन्होंने यह भी कहा कि इस महीने की शुरूआत में महाराष्ट्र पुलिस ने कुछ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें एक दक्षिणपंथी हिंदू संगठन का एक सदस्य भी शामिल था। इन लोगों को विस्फोटों की साजिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ऐसा इसलिए किया गया कि कर्नाटक पुलिस ने गौरी लंकेश हत्या मामले में कार्रवाई की थी।

उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक पुलिस ने उस मामले में महेश काले को पुणे से गिरफ्तार किया था जिसके चलते राज्य पुलिस कार्रवाई को मजबूर हुई।

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