Saturday, July 24, 2021

 

 

 

गिरफ्तारी के ड’र से फिर SC पहुंचे अर्णब गोस्वामी, नई FIR को रद्द करने की मांग की

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मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक न्यूज चैनल के संपादक और मालिक अर्नब गोस्वामी एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे है। जिसमे उन्होने हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज हुई FIR को रद्द करने की मांग की। बता दें कि अनर्ब के खिलाफ कथित तौर पर सांप्रादायिक भवानाएं भड़काने के आरोप में पायधुनि पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि अर्णब गोस्वामी ने अपनी नई याचिका में शीर्ष अदालत से अनुरोध किया है कि दो मई को दर्ज प्राथमिकी के संबंध में आगे किसी भी तरह की जांच से प्राधिकारियों को रोका जाए। बता दें कि, अर्नब गोस्वामी के रवैये के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार की याचिका के एक दिन बाद रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है।

हाल के दिनों में यह दूसरी बार है जब अर्नब गोस्वामी ने देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है और कई पुलिस मामलों में राहत की मांग की है।  मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा कि गोस्वामी ने टीवी शो में मस्जिद की तस्वीर प्रदर्शित की और 14 अप्रैल को इसके बाहर बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने पर सवाल उठाया। इस शो का प्रसारण 29 अप्रैल को किया गया।

मुंबई में दर्ज हुए अर्नब के खिलाफ इस नए मामले में मुंबई पुलिस ने आईपीसी की धराओं 153, 153A, 295A, 500,  511, 120 (B), के तहत मामला दर्ज किया हैं। अर्नब गोस्वामी के खिलाफ यह एफआईआर रजा फाउंडेशन वेलफेयर सोसायटी के सेक्रेटरी और नल बाजार निवासी इरफान अबुबकर शेख ने मुंबई के पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है।

उन्होंने रविवार को प्रेस से कहा, अर्णब ने अपने शो के माध्यम से एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की। उन्होंने रविवार को प्रेट्र से कहा, अर्णब ने अपने शो के माध्यम से एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की। शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि है कोविड-19 महामारी के प्रसार के लिए एक विशेष समुदाय को दोष देने के इरादे से चैनल पर कई सवाल पूछे गये और बहस भी हुई।

शिकायतकर्ता ने कहा, गोस्वामी ने इस समुदाय के खिलाफ कई नफरत भरी टिप्पणियां कीं थी। शेख ने कहा कि अर्नब ने बिना किसी ठोस वजह के बांद्रा मस्जिद को प्रवासियों के विरोध के साथ जोड़ दिया और इसे विरोध को सांप्रदायिक रंग दिया। जबकि इस विरोध का किसी समुदाय विशेष से कोई संबंध नंही था।

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