असम में सोमवार को जारी किए नेशनल रजिस्टर ऑफ सि‌ट‌िजंस (एनआरसी) के फाइनल ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं किया गया। इन नामों में सेना के पूर्व अधिकारी रहे अजमल हक का शामिल है। अजमल हक ने 30 साल सेना में रहकर देश की सेवा की है।

कामरूप जिले के चायगांव के निवासी अजमल हक ने बताया कि सभी वैध दस्तावेज जमा कराने के बाद भी उनका नाम गायब है। इतना ही नहीं उनके बेटे और बेटी का नाम भी एनआरसी से गायब है। चायगांव असम की राजधानी गुवाहाटी से 50 किलोमीटर दूर है।

बता दें कि 2016 में सेना के जूनियर कमीशन अफ़सर (जेसीओ) के पद से मोहम्मद अजमल हक रिटायर हुए थे। उन्होने कहा कि यह काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। इससे मुझे गहरा आघात लगा है। हक ने कहा कि उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि 30 साल देश की सेवा करने के बाद उऩ्हें इस तरह के अपमान का सामना करना पड़ेगा।

मोहम्मद अजमल हक 1986 में बतौर एक सिपाही सेना में भर्ती हुए थे और 2016 में वे जेसीओ के पद से रिटायर हुए।भारतीय सेना में अपनी 30 साल की नौकरी के दौरान हक ने जम्मू एंड कश्मीर के कारगील से लेकर पंजाब से सटे पाकिस्तान की सीमा पर ड्यूटी की हैं।

2017 में उन्हें विदेशियों की पहचान के लिए गठित फॉरनर्स ट्रिब्यूनल (एफटी) की ओर से अपनी नागरिकता साबित करने लिए नोटिस भेजा गया था। इस संदर्भ में असम पुलिस महानिदेशक मुकेश सहाय ने कहा, ”नोटिस भेजने के काम की एक प्रक्रिया होती है। नोटिस देने के समय उसकी जो प्रक्रिया है कि एक जांच अधिकारी जाता है और पूछताछ करता है।”