Friday, September 17, 2021

 

 

 

BHU विवाद के बीच बंगाल में संस्कृत के लिए मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति

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उत्तर प्रदेश स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संस्कृत के मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच कोलकाता के एक कॉलेज ने संस्कृत विभाग में एक मुस्लिम व्यक्ति को एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया है।

रमजान अली पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के रामकृष्ण विद्यामंदिर में संस्कृत पढ़ाते आए हैं। उनके पास उत्तर बंगाल के एक कॉलेज में नौ वर्ष तक पढ़ाने का अनुभव है।अली ने मंगलवार (19 नवंबर) से बेलूर कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया। मामले में अली ने कहा कि छात्रों और संकाय सदस्यों की ओर से किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत से वह अभिभूत हैं।

उन्होंने कहा, ‘प्राचार्य स्वामी शास्त्राज्ञानदा जी महाराज तथा अन्य सभी ने मेरा स्वागत किया… महाराज ने कहा कि मेरी धार्मिक पहचान का कोई मतलब नहीं है। कुछ मायने रखता है तो वह है भाषा पर मेरी पकड़, उसे लेकर मेरा ज्ञान और इस ज्ञान को छात्रों के साथ साझा करने की मेरी क्षमता।’

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वे बताते हैं, ‘स्कूल के दिनों में 7वीं क्लास से लेकर 12वीं तक एक विषय के रूप में हमने संस्कृत पढ़ी। संस्कृत ऐसा विषय है जो हमारे दिमाग की सारी गंदगी साफ कर देती है और हमें प्रेरित करती है।’ रमजान कहते हैं, ‘संस्कृत कोई धार्मिक भाषा नहीं है। यह कुछ विशेष रीति-रिवाजों का एक हिस्सा है लेकिन यह एक भारतीय भाषा है और देश की परंपराओं का भी एक हिस्सा है।

उन्होने कहा, मैं ​हर किसी को यह बताना चाहता हूं। भारत के लोगों के साथ-साथ बाहर के लोगों को भी इस विषय और इस भाषा को सीखना चाहिए।’ बीएचयू में चल रहे विवाद के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मैं मानता हूं कि संस्कृत भारत की विशाल परंपरा को दर्शाया करती है। यह मत भूलिए कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। कोई भी व्यक्ति दूसरे धर्म के लोगों को संस्कृत के पढ़ने-पढ़ाने से कैसे रोक सकता है?’

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