केंद्र सरकार की और से दाखिल हलफनामे के जवाब में रोहिंग्या मुस्लिमों ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है. जिसमे केंद्र सराकर के उस आरोप का जवाब दिया गया कि रोहिग्या मुस्लिमों के आतंकी संगठनों के साथ रिश्तें है और ये देश के लिए खतरा है.

रोहिंग्या मुस्लिमों ने केंद्र सरकार के इन आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए कहा कि उनका इस्‍लामिक स्‍टेट या किसी अन्य आंतकी संगठन से कोई रिश्ता नहीं है. साथ ही कहा गया कि रोहिंग्या मुस्लिम किसी आंतकी गतिविधि छोड़ आपराधिक गतिविधि में भी शामिल नहीं है.

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इसके लिए जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के उस बयान का हवाला दिया गया, जिसमे उन्होंने माना है कि रोहिंग्याओ पर कोई आपराधिक केस नहीं है. मुफ्ती  ने सदन में कहा था कि कोई भी रोहिंग्या आतंकी गतिविधियों में  सम्मिलित नहीं पाया गया है.

हलफनामें रोहिंग्याओं ने तिब्बतियों और श्रीलंका के शरणार्थियों की तरह ही भारत सरकार से बर्ताव किये जाने की अपील की. भारत सरकार के उन्हें वापस भेजने की फैसले पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा गया कि भारत सरकार द्वारा साइन की गई कई अंतरराष्ट्रीय संधियों के मुताबिक उन्हें सरंक्षण दिया जाना चाहिए. उनके वापस भेजने पर रोक लगाई जानी चाहिए.

अदालत को बताया गया कि भारत के नागरिक रोहिंग्या को दया की भावना से देखते हैं जबकि म्‍यांमार की सेना टॉर्चर करती है. इसी कारण रोहिंग्या जान बचाकर भारत आए हैं. हां उनकी हत्या की जा रही है और घर जला दिए गए हैं. इसलिए वो सिर्फ अवैध प्रवासी नहीं हैं.

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