केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में बड़ा संशोधन किया है। जिसके बाद अब कोई भी भारतीय ज़मीन खरीद सकता हैं।

सोमवार शाम केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक देश के किसी भी राज्य का कोई भी नागरिक अब बिना किसी मुश्किल मकान-दुकान बनाने या कारोबार के लिए जमीन खरीद सकता है। इसके लिए अब किसी भी तरह के डोमिसाइल या स्टेट सब्जेक्ट की औपचारिकता की जरूरत नहीं होगी। हालांकि डोमिसाइल की अनिवार्यता सिर्फ कृषि भूमि की खरीद के लिए होगी।

गृह मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में कहा कि इस आदेश को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (केंद्रीय कानूनों का अनुकूलन) तीसरा आदेश, 2020 कहा जाएगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। आदेश में कहा गया है कि सामान्य आदेश अधिनियम, 1897 इस आदेश की व्याख्या के लिए लागू होता है क्योंकि यह भारत के क्षेत्र में लागू कानूनों की व्याख्या के लिए है।

बीते वर्ष 5 अगस्त को भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करते हुए इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में विभाजित कर दिया था। अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था।

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने ट्विटर पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की। उमर अब्दुल्लाह ने ट्वीट किया, ”जम्मू-कश्मीर के भू-स्वामित्व क़ानून में जो संशोधन किया गया है, वह अस्वीकार्य है। यहां तक कि ग़ैर कृषि भूमि की ख़रीद और कृषि भूमि के ट्रांसफ़र के लिए डोमिसाइल की अनिवार्यता को हटाकर और आसान कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर अब सेल के लिए तैयार है और इससे ग़रीबों और छोटे भू मालिकों को इसका नुक़सान होगा।”

इसके अलावा उमर अब्दुल्लाह ने अगला ट्वीट किया है कि इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति है कि यह क़ानून केवल जम्मू-कश्मीर पर ही लागू होगा या लद्दाख़ पर भी लागू होगा।

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