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उत्तरप्रदेश के कानपुर में रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी की और से 3700 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के बाद अब एक और बड़ा घोटाला सामने आया है. डॉ एमपी अग्रवाल की कम्पनी श्री लक्ष्मी कॉटसन लिमिटेड ने 16 बैंकों से 3972 करोड़ रूपये का चुना लगाया है.

अग्रवाल की कंपनी ‘श्री लक्ष्मी कॉटसन’ पर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के 3904 करोड़ और यूको बैंक के 65 करोड़ जबकि आईएफसीएल के 5 करोड़ बकाया है. हालांकि सभी बैंकों ने कंपनी को डिफाल्टर घोषित कर दिया है.

बताया जा रहा है कि अग्रवाल की कंपनी ‘श्री लक्ष्मी कॉटसन’ का बैंक डिफ़ॉल्ट विक्रम कोठारी की रोटोमैक कंपनी से भी बड़ा है. 16 बैंकों के अरबों रुपए के एनपीए को वसूलने के लिए अब संपति नीलम करने का फैसला लिया गया है. हालाँकि इस कर्ज की पूरी भरपाई नहीं हो पाएगी.

दरअसल, कंपनी का मौजूदा घाटा 1646.12 करोड़ रुपये है. दीर्घअवधी का लोन 2406 करोड़ रुपये है जबकि शार्ट टर्म लोन 937 करोड़ रुपये है. साथ ही बैलेंस शीट की बात करें तो इतने बड़े लोन की रिकवरी के लिए कंपनी की कुल एसेट्स मात्र 1495 करोड़ रुपये ही है.

इसके अलावा बैलेंस शीट के मुताबिक कंपनी के पास बैंकों में कुल 2.54 करोड़ रुपये ही जमा हैं, जबकि इसे चलाने के लिए 577 करोड़ रुपये है और कुला आय मात्र 311 करोड़ रुपये है.

श्री लक्ष्मी कॉटसन को लोन देने वाली बैंकों में सिंडिकेट बैंक, यूनियन बैंक, केनेरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, एक्जिम बैंक, ओरिएण्टल बैंक ऑफ़ कॉमर्स, आईडीबीआई बैंक, विजया बैंक, कारपोरेशन बैंक, सारस्वत बैंक और आंध्र बैंक शामिल हैं.

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