कथित 12000 करोड़ के पीएनबी घोटाले में अब ऑल इंडिया बैंक आॅफिसर्स एसोसिएशन ने इस पुरे मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की भूमिका की जांच की मांग की है. साथ ही एसोसिएशन ने पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड की संलिप्ता की भी जांच की मांग की है.

जारी बयान में कहा गया कि पीएनबी मामले में घपला इतने साल तक बिना रुकावट के कैसे चलता रहा यह पता लगाने के लिए पीएनबी के बोर्ड और आरबीआई के स्तर पर संभावित चूकों की जांच भी होनी चाहिए.

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एसोसिएशन ने कहा कि विदेशी विनिमय व्यापार करने वाली अधिकृत शाखाओं के विदेशी विनिमय का समय-समय पर ऋणदाता द्वारा और आरबीआई द्वारा ऑडिट होता है. राष्ट्रीय बैंक की शाखा में सामान्यत: सात ऑडिट होते हैं, आंतरिक ऑडिट, समवर्ती ऑडिट (कॉनकरंट ऑडिट), स्नैप ऑडिट, वसूली (रिकवरी) ऑडिट, सांविधिक ऑडिट (स्टेच्युटरी ऑडिट), बाह्य ऑडिट और स्टॉक ऑडिट.

बयान में कहा गया, ‘अगर पीएनबी ने अपनी केंद्रीय बैंकिंग व्यवस्था (सीबीएस) से स्विफ्ट सिस्टम नहीं जोड़ा, तो इसके लिए पूरे बैंकिंग व्यवस्था को दोष देना बिल्कुल गलत और अन्यायपूर्ण है.’

एसोसिएशन के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक के बोर्ड  में बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट के तहत आरबीआई और सरकार के प्रतिनिधि भी थे. ऐसे सवाल उठता है कि इतने दिनों तक आरबीआई क्यों खामोश रहा. ध्यान रहे हीरा व्यापारी नीरव मोदी और उसके अंकल मेहुल चोकसी ये पूरा पैसा लेकर विदेश फरार हो गए.

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