सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ मुस्लिम विश्विद्यालय के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीरउद्दीन शाह की नियुक्ति पर सवाल उठते हुए पूछा कि उनकी नियुक्ति यूजीसी नियमों के अनुरूप हैं या नहीं.

इस मामलें में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की पीठ ने कहा कि अलीगढ मुस्लिम विश्विद्यालय एक केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं. और यूजीसी के नियम एएमयू पर भी अनिवार्य हैं. यूजीसी के नियमों के अनुसार कुलपति के रूप में एक शिक्षाविद की नियुक्ति होनी चाहिए और वह ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जिसने किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के रूप में कम से कम दस वर्ष काम किया हो.

पीठ ने आगे कहा, ‘अगर हर दूसरा केन्द्रीय विश्वविद्यालय नियमों का पालन करता है तो एएमयू क्यों नहीं? एक पूर्व सेना अधिकारी की नियुक्ति क्यों? हम उनकी क्षमताओं पर सवाल नहीं उठा रहे. हमारे सामने सवाल यह है कि उनकी नियुक्ति यूजीसी नियमों के अनुरूप हैं या नहीं.’

एएमयू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि यूजीसी नियम केवल केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए हैं, वीसी पद की नियुक्ति के लिए नहीं जो कि एक अधिकारी का पद है. शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने यूजीसी की धारा 26 का जिक्र करते हुए कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है.

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