हाथरस केस में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत दो कैजुअल्टी मेडिकल अफसरों को बर्खास्त कर दिया गया है। जिसमे जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के अस्थायी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अजीम मलिक भी शामिल है।

मलिक ने अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा था कि फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए 11 दिन बाद सैंपल लिए जाने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि इससे रेप होने की पुष्टि नहीं हो सकती है, जबकि सरकारी दिशानिर्देशों के मुताबिक, फॉरेंसिक रिपोर्ट में सही परिणाम आने के लिए घटना के 96 घंटे के भीतर सैंपल लिया जाना चाहिए। 

बताया जा रहा है कि सोमवार को सीबीआई ने दोनों डॉक्टरों से पूछताछ की थी। जिसके बाद आज एएमयू के वाइस चांसलर ने दोनों डॉक्टर्स को टर्मिनेट कर दिया है। 16 अक्टूबर को डॉ. अजीम एक को पत्र मिला, जिसमें कहा गया कि अस्पताल के अस्थायी सीएमओ बनाने के उनके कॉन्ट्रैक्ट को और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।

डॉक्टर ओबैद एवं डॉक्टर मोहम्मद अजीमुद्दीन मलिक की जेएन मेडिकल कॉलेज में लीव वैकेंसी के चलते नियुक्ति हुई थी। इस दौरान अस्पताल के 11 में से छह सीएमओ कोरोना संक्रमित पाए गए थे। उनकी नौकरी को नवंबर महीने तक के लिए बढ़ाया जाना था।

लेकिन बीते 16 अक्टूबर को उन्हें नोटिस देकर कहा गया कि उनका कार्यकाल 10 अक्टूबर से लेकर आठ नवंबर तक बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया गया है। इसके बाद 20 अक्टूबर को उन्हें उनके पद से तत्काल हटाने का नोटिस दिया गया।

डॉक्टर ओबैद ने कहा कि मैं मेडिकल ऑफिसर के पोस्ट पर थे। मुझे आज एक लेटर मिला है कि अपॉइंटमेंट कैंसिल किया जाता है और अब से आप ड्यूटी पर नहीं आइए। कारण हमें बताया नहीं गया है। यह तो मैं कह नहीं सकता क्या कारण रहा है।

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