रोहिंग्या मुस्लिमों पर अत्याचार के विरोध में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ‘सू’ से छिना सर्वोच्च सम्मान

11:38 am Published by:-Hindi News

यंगून। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने म्यांमार की नेता आंग सान सू की को दिया अपना सर्वोच्च पुरस्कार “एंबेसडर ऑफ कॉन्शंस” वापस ले लिया है। एमनेस्टी ने सू की पर अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ जारी हिसा पर चुप्पी साधकर मानवाधिकार के उल्लंघन का समर्थन करने का आरोप लगाया है।

लंदन स्थित वैश्विक मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि वह सू ची को दिया गया ‘‘ऐम्बैसडर आफ कॉन्शन्स अवार्ड” वापस ले रहा है जो उसने उन्हें 2009 में उस समय दिया था जब वह घर में नजरबंद थीं।

समूह द्वारा जारी एमनेस्टी इंटरनेशनल प्रमुख कूमी नायडू द्वारा लिखे खत में कहा गया है, आज हम अत्यंत निराश हैं कि आप अब आशा, साहस और मानवाधिकारों की रक्षा की प्रतीक नहीं हैं। समूह ने कहा कि उसने अपने फैसले के बारे में सू ची को रविवार को ही सूचित कर दिया था। उन्होंने इस बारे में अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बयान में ये भी कहा गया है कि सू की ने रोहिंग्या मुसलमानों के उत्पीड़न पर चुप्पी साध रखी है। यही नहीं उन्होंने सुरक्षा बलों को उनकी जवाबदेही से भी रक्षा की है। संस्था ने कहा है कि जिस मूल्य के लिए वह हमेशा लड़ती रही हैं, आज शर्मनाक तरीके से उसी के साथ विश्वासघात कर रही हैं।

बता दें कि लोकतंत्र की कभी सबसे बड़ी पैरोकार रही सू की को रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ म्यांमार में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी उनसे अपने पुरस्कार वापस ले लिए हैं। कनाडा ने भी उनसे मानद नागरिकता वापस ले ली है। सुरक्षा बलों पर रोहिंग्या उग्रवादियों के हमले के बाद म्यांमार की सेना ने 2017 में रोहिंग्या के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी।

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