बीजेपी द्वारा विभिन्न राज्यों में मुस्लिम नामों वाले स्थानो के नाम बदले जाने को लेकर इतिहासकार इरफान हबीब ने कहा कि सबसे पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का नाम बदलना चाहिए। दरअसल, उनका उपनाम ‘शाह’ गुजराती शब्द नहीं बल्कि फारसी मूल का है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर 87 वर्षीय इरफान हबीब ने कहा कि ”यहां तक कि गुजरात शब्द का उद्भव फारसी भाषा से हुआ है। पहले इसे ‘गुर्जरात्र’ कहा जाता था। उन्हें इसे भी बदलना चाहिए।”

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प्रोफेसर हबीब ने आरोप लगाते हुए कहा,” भाजपा का नाम बदलने का अभियान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हिंदुत्व नीति पर आधारित है। ये बिल्कुल पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की तरह है, जहां जो भी चीज इस्लामिक नहीं है, उसे हटा दिया जाता है। भाजपा और दक्षिणपंथी समर्थक उन चीजों को बदल देना चाहते हैं जो गैर हिंदू है और खासतौर पर इस्लामिक मूल की हैं।”

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शाह शब्द का मूल फारसी से है जिसका ​​अर्थ राजा होता है। शाह उपनाम भारत में अधिकतर सैय्यद मुस्लिमों के द्वारा लगाया जाता है। लेकिन शाह शब्द संस्कृत भाषा के शब्द साधु से भी आता है, जिसका अर्थ भला व्यक्ति होता है।

भारत में शाह उपनाम का इस्तेमाल अधिकतर कारोबारी समुदाय जैसे वैश्य समुदाय करता है। इसके अलावा शाह/साह उपनाम गुजरात, राजस्थान और यूपी में जैन और वैष्णव भी करते हैं। वहीं मुस्लिम समुदाय में भी शाह उपनाम का इस्तेमाल किया जाता है।

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