Thursday, January 27, 2022

राज्यसभा में कश्मीर पर तीखी बहस, अमित शाह बोले – कर्फ्यू जैसे कोई हालात नहीं

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राज्यसभा में बुधवार को विपक्ष में जम्मू-कश्मीर के हालात का मुद्दा उठाया। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में 5 अगस्त के बाद एक भी व्यक्ति की मौ’त पुलिस की गोली से नहीं हुई। जहां तक इंटरनेट की बात है, तो इस पर पहले भी रोक लगाई गई थी। जब हम इंटरनेट पर रोक लगाएंगे, तो यह फैसला जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों से पूछकर लिया जाएगा।

उन्‍होंने कहा कि देश में स्‍वास्‍थ और शिक्षा की व्‍यवस्‍था उस समय भी चल रही थी जब देश में इंटरनेट नहीं था। अमित शाह ने कहा कि पूरे देश में मोबाइल लगभग 1995-97 के आसपास आया और कश्मीर में मोबाइल 2003 में भाजपा ने पहली बार शुरू किया तब तक सुरक्षा कारणों के कारण शुरू नहीं किया गया था। इंटरनेट भी कई सालों तक रोका गया। 2002 में वहां इंटरनेट की परमिशन दी गई।

अमित शाह ने कहा कि कश्मीर में पड़ोसी देश के द्वारा बहुत सारी गतिविधियां चलती रहती है और वहां की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को देखकर ही ये निर्णय लिया जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर के प्रशासन को उचित समय लगेगा तो वो मीटिंग करके बताएंगे कि इंटरनेट सेवा कब से बहाल करनी है तब इस पर हम निर्णय लेंगे। उन्‍होंने कहा कि उचित समय पर वहां के प्रशासन की अनुशंसा के आधार पर ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है।

दरअसल, जब राज्यसभा में गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि आज के जमाने में इंटरनेट, स्वास्थ्य काफी जरूरत है। पड़ोसी देश 1947 से है, हम भी सीएम रहे हैं कुछ ही दिनों के लिए इंटरनेट बंद रहता था लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि साढ़े तीन महीने तक इंटरनेट बंद कर दिया जाए।

अस्पतालों में दवाओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में जरुरी दवाएं उपलब्ध हैं। अगर किसी के पास कोई सूचना है कहीं दूर इलाके की भी तो वह मुझसे कभी भी संपर्क कर सकता है, उसे मदद पहुंचाई जाएगी। घाटी के सभी हॉस्पिटल खुले हैं।

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