अमित शाह ने दिल्ली हिंसा को सुनियोजित, बोले – यूपी से आए थे 300 दंगाई

नई दिल्ली: दिल्ली हिंसा को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जवाब दिया। जिसमे उन्होने कहा कि 25 फरवरी की रात 11 बजे के बाद से रिकॉर्ड के मुताबिक कोई भी हिंसा की घटना नहीं हुई। उन्होने इस हिंसा को सुनियोजित बताते हुए कहा कि दिल्ली में हिंसा फैलाने के लिए 300 से ज्यादा लोग यूपी से आए थे। यह गहरी साजिश थी।

उन्होंने कहा कि 25 तारीख को 11 बजे के बाद एक भी दंगे की घटना नहीं हुई। उन्होंने कहा कि 27 फरवरी से अबतक 700 एफआईआर दर्ज की गई है। नरेंद्र मोदी की सरकार हिंसा में शामिल किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी। इससे पहले लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने दिल्ली में पिछले दिनों भड़की हिंसा को ‘इंसानियत की हार’ बताया और बुधवार को कहा कि सरकार चाहती तो समय रहते दंगों पर काबू कर सकती थी।  उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस देश के सर्वश्रेष्ठ संसाधन संपन्न बलों में शामिल है, उसके बाद भी तीन दिन तक राजधानी में हिंसा चलती रही। कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस चाहती तो हिंसा पर तत्काल काबू कर सकती थी। चौधरी ने कहा, ‘‘गृह मंत्री को इस बारे में स्पष्टीकरण देना होगा।’’

इस पर अमित शाह ने कहा, दिल्ली की आबादी 1.70 करोड़ है। जहां दंगा हुआ वहां की आबादी 20 लाख है। 20 लाख लोगों के बीच दंगा हुआ और इसे पूरी दिल्ली में नहीं फैलने देने में दिल्ली पुलिस ने अहम भूमिका निभाई। दिल्ली पुलिस ने सही तरीके से काम किया। इसके लिए शाह ने दिल्ली पुलिस की प्रसंशा की। 24 फरवरी 2020 को दो बजे के आसपास हिंसा की पहली सूचना मिली। 25 फरवरी को 11 बजे आखिरी सूचना मिली। दिल्ली में 36 घंटे तक दंगे हुए। पुलिस ने 36 घंटे में दंगे पर काबू पाया।

गृहमंत्री ने कहा, ”तथ्यों के साथ तोड़फोड़ करने का किसी को अधिकार नहीं है। विपक्ष ने कहा कि दिल्ली हिंसा के वक्त मैं ट्रंप के साथ उनके कार्यक्रम में बैठा था जबकि ये गलत है। मैं न तो उनके साथ ताजमहल गया, न राष्ट्रपति भवन में आयोजित रात्रिभोज कार्यक्रम में गया। मेरे संसदीय क्षेत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का दौरा था फिर भी मैं वहां नहीं गया। 24 फरवरी की शाम से लेकर 25 फरवरी की शाम तक हुई सभी बैठकें मेरी अध्यक्षता में हुईं। मैं पूरे समय दिल्ली पुलिस के संपर्क में था और मैं खुद दिल्ली हिंसा से प्रभावित इलाकों में इसलिए नहीं गया क्योंकि फिर दिल्ली की पुलिस का ध्यान मेरी सुरक्षा पर जाता। मैंने ही एनएसए अजीत डोभाल को इस मामले को संभालने के लिए कहा और वो मेरी ही सलाह पर दिल्ली के हिंसाग्रस्त इलाकों में गए थे।”

अमित शाह ने कहा कि माननीय सदस्य ने कहा कि हमे सीआरपीएफ भेजनी चाहिए थी, इस तरह के कई सुझाव दिए गए। आप सुझाव दे सकते हैं। शाह ने कहा कि दंगों पर नियंत्रण पाने के लिए 23 कंपनियों को भेजा गया था। 24 फरवरी को 40 कंपनियां, 25 को और 50 कंपनियां भेजी। आजतक 80 कंपनियां दिल्ली में तैनात हैं। गुनहगारों को पकड़ने की भी व्यवस्था शुरू कर दी गई है। कुछ सदस्य ये सवाल उठा रहे हैं कि एफआईआर हुई या नहीं, आजतक 700 एफआईआर दर्ज की गई है।

शाह ने कहा कि 2647 लोगों को हिरासत या अरेस्ट किया गया है। 25 से ज्यादा कंप्यूटर पर वीडियो फुटेज का विश्लेषण हो रहा है। विज्ञापन देकर मीडिया और अन्य लोगों से इसकी जानकारी मांगी है, उनसे वीडियो फुटेज या डिटेल देने के लिए कहा गया है। दिल्ली की जनता ने हजारों की संख्या में वीडियो और जानकारी दी है। 1100 से ज्यादा लोगों की पहचान हुई है, 300 से ज्यादा लोग यूपी से दंगा करने के लिए आए थे। इन लोगों की पहचान यूपी से मंगाए गए डेटा से मिली है। 24 फरवरी की रात को 10 बजे यूपी के बॉर्डर को सील कर दिया गया था।

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