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तुलसीराम प्रजापति के फर्जी एनकाउंटर के मामले में जांच अधिकारी संदीप तामगड़े ने स्पेशल कोर्ट को बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, आईपीएस अधिकारी दिनेश एमएन, राजकुमार पांड्या और डीजी वंजारा कथित तौर पर तुलसीराम प्रजापति के फर्जी एनकाउंटर के मुख्य साजिशकर्ता थे।

तामगड़े ने कोर्ट को यह भी बताया कि यह राजनेताओं और अपराधियों की साठगांठ का परिणाम था। इसमें अमित शाह और राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया कथित तौर पर वह राजनेता थे जिन्होंने 2004 में मशूहर बिल्डरों के ऑफिसों में आग लगवाने के लिए सोहराबुद्दीन शेख, तुलसीराम और आजम खान जैसे अपराधियों का इस्तेमाल किया था।

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तामगड़े ने यह भी दावा किया है कि आरोपी के कॉल डेटा रिकॉर्ड्स (सीडीआर) से साबित होता है कि उसने ही अपराध की साजिश रची थी। तामगड़े से जब पूछा गया कि क्या किसी सीडीआर की जांच के दौरान साजिश का पता लगा। उन्होंने सकारात्मक जवाब देते हुए कहा कि क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान अधिकारी इस बात के लिए सहमत हुए कि सीडीआर किसी विशेष समय पर किसी व्यक्ति के स्थान का पता लगाने के लिए सबसे अच्छे सबूत हैं।

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जब बचाव पक्ष के वकीलों ने उन लोगों के नाम देने के लिए कहा जिनके सीडीआर में साजिश रची गई। तब तामगड़े ने अमित शाह, दिनेश एमएन, वंजारा, पांड्या, विपुल अग्रवाल, आशीष पांड्या और एनएच दाभी और जीएस राव का नाम लिया। इसमें से पांड्या, दाभी और राव ट्रायल का सामना कर रहे हैं जबकि दूसरों को साक्ष्य को कमी की वजह से छूड़ दिया गया। सीबीआई ने कथित अपराध से पहले और उसके बाद आरोपियों में इन पुरुषों की कॉल डिटेल शामिल की थी। ट्रॉयल कोर्ट ने तब इन आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि उनके खिलाफ प्रर्याप्त सबूत नहीं हैं।

जांच एजेंसी के मुताबिक 23 नवंबर, 2005 को सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी कौसरबी और तुलसीराम के अपहरण की साजिश रची गई थी। सीबीआई के आरोपपत्र के मुताबिक 26 नवंबर, 2005 को सोहराबुद्दीन को कथित रूप से आयोजित मुठभेड़ में मारा गया था, लेकिन कौसरबी की भी हत्या कर दी गई थी।

वहीं पूर्व मुख्य जांच अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने कहा कि इन मामलों से अमित शाह के अलावा गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा, पूर्व एसपी (उदयपुर) दिनेश एमएन, पूर्व एसपी (अहमदाबाद) राजकुमार पांडियन और पूर्व डीसीपी (अहमदाबाद) अभय चूड़ास्मा को फायदा हुआ था।

अमित शाह को कथित रूप से इस तरह फायदा हुआ कि उन्हें पटेल भाईयों द्वारा तीन बार में 70 लाख रूपये दिया गया था। पटेल भाईयों को कथित रूप से सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति ने धन उगाही के लिए जान से मारने की धमकी दी थी। गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी डीजी वंजारा को भी फायदा हुआ था क्योंकि एनकाउंटर करने के लिए उन्हें 60 लाख रूपया दिया गया था।

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